-सांसद द्वारा जनसुनवाई के सुखद परिणाम आने लगे सामने
-सरकार के निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही पर सांसद ने दुखः जताया
24 News Update उदयपुर। सरकार ने राजकीय कर्मचारियों के सेवा में रहते मृत्यु के बाद परिवार को राहत देने के लिए अनुग्रह अनुदान भुगतान की राशि का प्रावधान किया है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र बजट को लेकर मामले को लटकाए रहते हैं और आखिरकार पीडित को समय पर मदद नहीं मिल पाती है।
वन विभाग से जुडा ऐसा ही एक मामला सांसद डॉ मन्नालाल रावत की जनसुनवाई में सामने आया था, जिसमें चार साल से एक महिला को मदद नहीं मिल पाई। इस मामले में सांसद ने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर पीडित महिला को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। इसके बाद अधिकारियों ने फाइल आगे बढाई।
यह मामला है एक गरीब आदिवासी परिवार की बदनी का, जिनके पति की राजकीय सेवा में रहते मृत्यु हो जाने पर सरकार की ओर से किए गए प्रावधान के अनुसार अनुग्रह अनुदान भुगतान की राशि 20 लाख रुपए देनी थी, लेकिन स्व.श्री मनजी मीणा की आश्रिता श्रीमती बदनी मीणा को 04 वर्ष उपरान्त भी अनुग्रह अनुदान भुगतान नहीं किया गया। इस पर बदनी व उनके परिवारजनों ने जनसुनवाई के दौरान सांसद डॉ रावत को अपनी अपनी पीडा बताई। सांसद डॉ रावत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उप वन संरक्षक, उदयपुर से बात की और उन्हें पत्र भेजकर इस मामले को तत्काल निबटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोष में पर्याप्त बजट होने के बावजूद मामले को लटकाना और पीडिता को चक्कर देना उचित नहीं है। यह सरकार की नीति नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार आदिवासी क्षेत्र व लोगों के लिए समर्पित भाव से काम कर रही है।
सांसद डॉ रावत के पत्र के बाद उप वन संरक्षक ने संभागीय मुख्य संरक्षक को पत्र भेजकर बदनी मीणा का बिल पारित करने की अधिकृति जारी करने का आग्रह किया है।
पत्र में उप वन संरक्षक ने लिखा कि श्रीमति वदनी मीणा पत्नी स्व. श्री मनजी मीणा को नियमानुसार 20.00 लाख रूपये अनुग्रह अनुदान के लिए बिल बनाकर अक्टूबर 2022 एवं फरवरी 2023 में कोषालय शाखा उदयपुर को भिजवाया गया था जिसमें कोषालय शाखा उदयपुर द्वारा पर्याप्त बजट नहीं होने का आक्षेप लगाया गया था। बजट के अभाव में श्रीमति बदनी मीणा को नियमानुसार अनुग्रह अनुदान का भुगतान नहीं हो सका। वर्ष 2025-26 में एफएमएस में पूल बजट में 20.00 लाख की उपलब्धता बताई गई। बदनी मीणा को अनुग्रह अनुदान के लिए पुनः बिल नम्बर 55598191 दिनांक 15.09.2025 को बनाया जाकर कोषालय शाखा उदयपुर को भिजवाया गया जिसमें भी पर्याप्त बजट नहीं होने का आक्षेप लगाया गया है। उप वन संरक्षक ने इस मामले में संभागीय मुख्य संरक्षक से स्वीकृति जारी करने के संबंध में पत्र लिखा है।
सांसद सेवा केंद्र जिला परिषद उदयपुर में सांसद डॉक्टर मन्नालाल रावत की जनसुनवाई में आए इस प्रकरण में सांसद के हस्तक्षेप के बाद अब बदनी के बकाया भुगतान की राह बनी है।
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