उदयपुर, 14 सितंबर। नरपत सिंह हत्या प्रकरण को लेकर श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के नेतृत्व में सायरा कस्बे का बंद और आक्रोश प्रदर्शन सफल रहा। घंटों चले विरोध-प्रदर्शन और प्रशासन के साथ वार्ता के बाद करणी सेना और प्रशासन के बीच आंशिक सहमति बनी। इसके तहत मृतक के परिवार को ₹12.30 लाख की राशि विभिन्न सरकारी योजनाओं से उपलब्ध कराई जाएगी और मृतक की पत्नी को संविदा पर नौकरी दी जाएगी। इन आश्वासनों के बाद करणी सेना ने धरना समाप्त कर दिया। करणी सेना का आक्रोश और चार मांगें प्रदर्शन के दौरान करणी सेना ने सरकार व प्रशासन से चार प्रमुख मांगें रखीं: मृतक परिवार को ₹51 लाख का मुआवजा। मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी। मृतक की पत्नी का सम्पूर्ण सरकारी खर्च पर इलाज। फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर दोषियों को फांसी जैसी कठोरतम सजा। जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत (गढ़पुरा) ने कहा कि “सिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं है। जब तक दोषियों को सख्त सजा और पीड़ित परिवार को सुरक्षा नहीं मिलती, समाज चैन से नहीं बैठेगा। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और भी उग्र होगा।” सामाजिक सहयोग का आश्वासन चुंडावत ने घोषणा की कि समाज स्तर पर भी मृतक परिवार को सहयोग दिया जाएगा। आने वाले 10–15 दिनों में सामाजिक योगदान जुटाकर परिवार को अतिरिक्त आर्थिक व सामाजिक मजबूती दी जाएगी। जनसमर्थन और उपस्थिति सभा में प्रदेश उपाध्यक्ष जीवन सिंह, शूरवीर सिंह भाटी, परमवीर सिंह, संभाग उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह, घनश्याम सिंह, बलबीर सिंह, राम सिंह, डॉ. दियानी कटारा, निर्भय सिंह देवड़ा, तहसील अध्यक्ष हिम्मत सिंह सुवावत, हरि सिंह झाला, विजय सिंह (मृतक का परिवार) सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation भारतीय चिंतन में महिला विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन, डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने किया शुभारंभ मेवाड़ से शुरू हुआ यह शास्त्रार्थ निरंतर प्रवाहित रहना चाहिए – हनुमान सिंह, -भारतीय कालगणना और ज्योतिष विषयक संगोष्ठी में अखिल भारतीय विद्वत समिति बनाकर प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने का संकल्प