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राजस्थान विद्यापीठ में अकादमिक सुधारों को रफ्तार: नई शिक्षा नीति आधारित पाठ्यक्रमों को मंजूरी, शोध और नामांकन बढ़ाने पर जोर

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24 News Update उदयपुर, 29 अप्रैल। राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय में बुधवार को प्रतापनगर स्थित कुलपति सचिवालय सभागार में रिसर्च बोर्ड एवं एकेडमिक काउंसिल की संयुक्त बैठक कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश और शोध आधारित नवीन पाठ्यक्रमों को लेकर अहम निर्णय लिए गए।
बैठक में विभिन्न शैक्षणिक और शोध प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा के बाद उन्हें सर्वसम्मति से स्वीकृति दी गई। इस दौरान कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर, प्रो. प्रतापसिंह चौहान और प्रो. योगानंद शास्त्री भी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 केवल पाठ्यक्रम बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा, नवाचार, कौशल और आत्मनिर्भरता पर आधारित समग्र शिक्षा दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि विद्यापीठ शिक्षा को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और वैश्विक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए आगे बढ़ रहा है।
बैठक में विभिन्न संकायों के पाठ्यक्रमों के पुनर्संरचना, बहुविषयक शिक्षा, कौशल आधारित शिक्षण, शोधोन्मुखी अध्ययन और रोजगारपरक कार्यक्रमों पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा—जैसे आयुर्वेद, योग, दर्शन, पर्यावरण चेतना और लोक विज्ञान—को शिक्षा के मुख्य प्रवाह में शामिल करने पर सहमति बनी।

नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य
कुलपति ने बताया कि उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) को वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचाने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप विद्यापीठ भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2012 में जहां विश्वविद्यालय में करीब 2200 विद्यार्थी थे, वहीं वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 11 हजार तक पहुंच चुकी है। वर्ष 2035 तक इसे 25 हजार तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

शोध और नवाचार पर विशेष फोकस
बैठक में अंतर्विषयी शोध को बढ़ावा देने, शोध प्रकाशनों की गुणवत्ता सुधारने, पेटेंट और नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा समाजोपयोगी अनुसंधान को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया। इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली, प्रो. जी.एम. मेहता, प्रो. मलय पानेरी, परीक्षा नियंत्रक प्रो. पारस जैन सहित विश्वविद्यालय के डीन, डायरेक्टर, विभागाध्यक्ष और अन्य शिक्षाविद मौजूद रहे। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम और डिजिटल लर्निंग जैसे प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू कर विद्यापीठ को आधुनिक, लचीला और शोध-आधारित शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।

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