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विद्यापीठ में पर्यावरण जागरूकता पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस 7 अप्रैल से, 150 से अधिक प्रतिभागी होंगे शामिल

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24 News Update उदयपुर। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के शिक्षा संकाय अंतर्गत लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, डबोक द्वारा सर्व विद्यालय केलवानी मंडल, काडी (गांधीनगर, गुजरात) के सहयोग से “एनवायरनमेंटल अवेयरनेस फ्रॉम नॉलेज टू एक्शन (पर्यावरणीय जागरूकता: ज्ञान से क्रिया तक)” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ 7 अप्रैल से होगा। यह कॉन्फ्रेंस हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में आयोजित की जा रही है।
कुलपति प्रो. (कर्नल) एस.एस. सारंगदेवोत ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को व्यवहारिक क्रियान्वयन से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास जैसे वैश्विक मुद्दों पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है और ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच ज्ञान, शोध और व्यावहारिक समाधान के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सारंगदेवोत ने बताया कि सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों—केरल, तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान सहित विदेश से मोजाम्बिक तक के प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कुल प्रतिभागियों की संख्या लगभग 154 है, जिससे आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप मिला है।
डीन प्रो. सरोज गर्ग ने जानकारी दी कि उद्घाटन सत्र में ‘वॉटर मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध राजेंद्र सिंह मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखेंगे, जबकि यूनेस्को से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. राम भुज विशेष अतिथि के रूप में संबोधित करेंगे।
सम्मेलन के दौरान दो दिनों में विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित होंगे, जिनमें प्रमुख विषयों में—पर्यावरण शिक्षा एवं सामान्य जागरूकता (प्रदूषण, वनों की कटाई, जीवाश्म ईंधन, संसाधनों की कमी, कार्बन फुटप्रिंट), पर्यावरण संरक्षण के उपाय, भारतीय प्राचीन तकनीकें एवं सतत पर्यावरणीय विकास, उर्वरकों के विकल्प एवं पारिस्थितिकीय समस्याओं के समाधान हेतु नवाचार तकनीकें, स्थानीय क्षेत्र की जैव विविधता प्रबंधन में संस्थानों एवं हितधारकों की भूमिका, वर्तमान भू-राजनीतिक जोखिमों का वैश्विक पर्यावरण पर प्रभाव (जलवायु परिवर्तन, ग्रीनहाउस गैसें, ग्लेशियर, ओवरहीटिंग, स्वास्थ्य प्रभाव), मानव हस्तक्षेप और जैव विविधता पर संकट, तथा 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के माध्यम से शांति, समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय शामिल हैं। इन सत्रों में शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण भी किया जाएगा।
कॉन्फ्रेंस आयोजक डॉ. रचना राठौड़ एवं डॉ. बलिदान जैन ने बताया कि आयोजन की सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी, जिससे अधिकतम प्रतिभागियों को जुड़ने का अवसर मिल सके।

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