24 News Update उदयपुर. उदयपुर के सेंट ग्रेगोरियस स्कूल विवाद में अब नया मोड़ आ गया है—और यह मोड़ जितना चौंकाने वाला है, उतना ही रणनीतिक भी। स्कूल प्रशासन ने शिक्षकों को “वापस लेने” और “निलंबन समाप्त करने” जैसी आधी-अधूरी सूचनाएँ हवा में उछालकर भ्रम का नया जाल बिछाना शुरू कर दिया है।लेकिन ज़मीन पर सच्चाई बिल्कुल उलटी है—न निलंबन पूरी तरह से समाप्त हुआ है, न ही किसी को पूर्ण राहत मिली है। आंदोलन स्थल पर बैठे शिक्षकों, अभिभावकों और नागरिकों ने इस चाल को साफ़ शब्दों में खारिज कर दिया है। धरना जारी है। आक्रोश और तेज हो रहा है। “वापसी कोई भीख नहीं—सम्मानजनक शर्तों पर पूर्ण न्याय चाहिए”: आंदोलनकारी शिक्षक धरना स्थल पर आज एक ही आवाज़ गूंजती रही—“आधी-अधूरी वापसी मंजूर नहीं… सम्मान चाहिए, बराबरी चाहिए, न्याय चाहिए!” शिक्षकों का साफ कहना है कि स्कूल प्रशासन केवल ‘टाइम बोरो’ कर विवाद को शांत करना चाहता है ताकि आगे एक-एक कर आंदोलन करने वालों को निशाने पर लिया जा सके।प्रबंधन द्वारा जारी चिट्ठियों में निलंबन वापसी का दावा तो किया गया, लेकिन— न सर्विस ब्रेक हटाया गया न गलत आदेश वापस लिए गए न प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल और मैनेजर के व्यवहार पर कोई ठोस निर्णय न ही पूर्व की प्रताड़नाओं की जांच का ज़िक्र यानी ना रोग का इलाज, ना पीड़ा का समाधान—सिर्फ़ भ्रम फैलाने का प्रयास। स्कूल की ‘नई रणनीति’: भ्रम, देरी, टालमटोल धरना स्थल पर मौजूद लोगों का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया एक सोची-समझी रणनीति है—पहले आधी-अधूरी चिट्ठियाँ जारी करना,फिर कुछ मीडिया संस्थानों में ‘वापसी’ की खबर फैलवाना,और वातावरण ऐसा बनाना कि जैसे समस्या हल हो गई हो। लेकिन धरना स्थल पर बैठे शिक्षक और अभिभावक स्पष्ट कह रहे हैं—“ये सब झूठे सब्ज़बाग हैं। कोई भी स्थाई राहत अभी तक नहीं दी गई है।” प्रशासन की चुप्पी ने विवाद को और भड़काया सबसे बड़ा सवाल प्रशासन पर ही है।पूरा शहर पूछ रहा है— जिला शिक्षा अधिकारी कहाँ हैं? क्यों कोई नुमाइंदा मौके पर नहीं भेजा गया? क्यों 2300 बच्चों वाले स्कूल में पूरा मामला स्वयं स्कूल पर छोड़ दिया गया? क्यों फादर, प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल को कार्रवाई से ‘छूट’ मिली हुई है? कल रात ढाई बजे तक भीषण ठंड में शिक्षक, छात्र और अभिभावक सड़क पर बैठे रहे,लेकिन प्रशासन का एक भी अधिकारी मौके पर नहीं आया।लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन, जिला शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन की मिलीभगत सेशिक्षकों को प्रताड़ित किया जा रहा है। परीक्षा रद्द—बच्चों को ‘दबाव’ में लेने की साजिश? दो दिन पहले स्कूल प्रशासन ने जो निर्णय लिया, उसने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया—प्ले-ग्रुप से 12वीं तक की सभी परीक्षाएँ अनिश्चितकाल के लिए रद्द। बच्चों के अभिभावक आगबबूले हैं—“किसकी सुरक्षा की बात कर रहे हैं?जब वर्षों से शिक्षकों को मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी, तब सुरक्षा कहाँ गई थी?आज आंदोलन तेज़ हुआ तो बच्चों की परीक्षा को ढाल बनाया जा रहा है!” शहर जाग चुका है—पूर्व छात्र भी कूदे मैदान में कई पूर्व छात्रों ने देश-विदेश से वीडियो संदेश भेजते हुए कहा—“हम इस रवैये को अच्छी तरह पहचानते हैं।यह अब सिर्फ दो शिक्षकों का मामला नहीं, स्कूल की संस्कृति और बच्चों के भविष्य का सवाल है।” धरने पर छात्रों, अभिभावकों, पूर्व शिक्षकों और नागरिकों की संख्या दोगुनी होती जा रही है। मुख्य मांगें—बिना शर्त न्याय आंदोलनकारी समुदाय की स्पष्ट मांगें— प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल और फादर—तीनों को हटाया जाए निलंबन पूरी तरह रद्द हो, सर्विस ब्रेक समाप्त हो शिक्षक की प्रतिष्ठा बहाल हो सीसीटीवी की अनुचित निगरानी बंद हो मानसिक प्रताड़ना की निष्पक्ष जांच हो परीक्षाओं की तत्काल नई तिथि घोषित की जाए प्रशासन मौके पर हस्तक्षेप करे संघर्ष निर्णायक मोड़ पर अब आंदोलन किसी भी तरह शांत होने वाला नहीं है।धरने पर साफ चेतावनी दी जा रही है—“यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक पूर्ण न्याय नहीं मिलता।वापसी हम मांग नहीं रहे—वापसी हमारी गरिमा है, और यह सम्मानजनक शर्तों पर ही स्वीकार होगी।” सेंट ग्रेगोरियस स्कूल का विवाद अब सिर्फ दो शिक्षकों का झगड़ा नहीं—यह उदयपुर की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय संवेदनशीलता की परीक्षा बन चुका है। और इस परीक्षा में अभी तक—स्कूल प्रशासन, जिला शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन—तीनों फेल नजर आ रहे हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सांसद डॉ रावत के प्रश्न पर केंद्रीय मंत्री का जवाब: घटिया व निम्न गुणवत्ता वाले बीजों और कीटनाशकों को रोकने सरकार सख्त भजनलाल सरकार के दो वर्ष सुशासन, सुराज और विकास के प्रतीक : बाबूलाल खराड़ी