24 News Update प्रयागराज। प्रयागराज महाकुंभ से उपजे विवाद के बीच किन्नर अखाड़े ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी को अखाड़े से बाहर कर दिया है। अखाड़े की शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ममता कुलकर्णी का संगठन से किसी भी प्रकार का नाता नहीं है। इस फैसले के साथ ही संत समाज और अखाड़ा परंपरा में चल रहा विवाद और गहरा हो गया है।
किन्नर अखाड़े के पदाधिकारियों की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि ममता कुलकर्णी न तो अब अखाड़े की अधिकारी हैं और न ही सदस्य। अखाड़े की प्रमुख महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने जारी वीडियो संदेश में कहा कि अखाड़ा शांति और मर्यादा में विश्वास करता है तथा किसी भी तरह के विवाद से स्वयं को अलग रखना चाहता है। मौनी अमावस्या के दिन घटित घटनाओं और बयानों से अखाड़ा आहत है, इसी के चलते यह कठोर फैसला लिया गया। दरअसल, 25 जनवरी को ममता कुलकर्णी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर दिए गए बयान में कई महामंडलेश्वरों और शंकराचार्य पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उनके इन बयानों के बाद संत समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और अखाड़े के भीतर भी असंतोष गहराता गया। अखाड़े से बाहर किए जाने के बाद ममता कुलकर्णी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा दिया है। उनका कहना है कि महामंडलेश्वर बनना वर्षों की साधना, तपस्या और कठोर आध्यात्मिक अनुशासन का परिणाम होता है और वह अभी इस बंधन से स्वयं को मुक्त करना चाहती हैं। इधर, सनातनी किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी उर्फ टीना मां ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ममता कुलकर्णी को लेकर शुरू से ही विरोध था और अब बहुत देर हो चुकी है। टीना मां ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह पुराने अखाड़े में वापस नहीं जाएंगी। गौरतलब है कि टीना मां ने नवंबर 2025 में अलग सनातनी किन्नर अखाड़े की स्थापना की थी।
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