24 News Update. जयपुर। वर्दी और वकालत, दोनों ही न्याय व्यवस्था के स्तंभ माने जाते हैं। लेकिन जब यही स्तंभ सौदेबाजी करने लगें, तो आम आदमी के लिए न्याय सिर्फ कागजों में रह जाता है। जयपुर में कानून के रखवालों पर ही कानून ने शिकंजा कस दिया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक ऐसे गठजोड़ का पर्दाफाश किया है, जहां वर्दी और वकालत मिलकर “सेटिंग” का कारोबार चला रहे थे।
मामला विधायकपुरी थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां तैनात हेड कॉन्स्टेबल और एक एडवोकेट के खिलाफ रिश्वत मांगने का केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि FIR से नाम हटाने और चार्जशीट “मैनेज” करने के बदले लाखों की मांग की गई।
ट्रक जब्ती से शुरू हुआ खेल, फिर शुरू हुई ‘डीलबाजी’
हरियाणा के चरखी दादरी के एक ट्रांसपोर्टर की शिकायत के मुताबिक, अगस्त 2025 में उसका ट्रक ड्राइवर शराब के नशे में पाया गया, जिसके बाद पुलिस ने ट्रक जब्त कर लिया। कुछ दिनों बाद ट्रक थाने के पास खड़ा मिला और व्यापारी उसे लेकर रवाना हो गया।
यहीं से कहानी ने मोड़ लिया। पुलिस ने व्यापारी, उसके भाई और ड्राइवर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। बाद में व्यापारी और ड्राइवर को गिरफ्तार भी किया गया, हालांकि जमानत मिल गई।
नाम हटाने के लिए ‘रेट कार्ड’ तय
जांच अधिकारी हेड कॉन्स्टेबल ने मामले को “हल्का” करने के नाम पर सीधे 5 लाख रुपए की मांग रख दी।
यहां एंट्री होती है एक एडवोकेट की—जिसने खुद को “मध्यस्थ” बनाकर डील सेट करनी शुरू की। पहले 5 लाख की मांग
फिर 1 लाख तक “मोलभाव” हुआ, आखिरकार 25 हजार रुपए पर सौदा फाइनल हुआ। बताया गया कि रकम देने पर FIR से भाई का नाम हटाकर चार्जशीट पेश करने का भरोसा दिया गया।
मोबाइल कॉल से खुली पोल, ACB ने पकड़ी कड़ी
परिवादी ने हिम्मत दिखाते हुए पूरा मामला ACB तक पहुंचाया। जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद ACB ने हेड कॉन्स्टेबल और एडवोकेट—दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।

