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नराकास उदयपुर की 45वीं अर्द्धवार्षिक बैठक संपन्न, हिंदी के प्रगामी प्रयोग पर जोर

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24 News update उदयपुर। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), उदयपुर की 45वीं अर्द्धवार्षिक बैठक गुरुवार को भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र स्थित सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष एवं प्रधान आयकर आयुक्त डॉ. रण सिंह (आयकर कार्यालय, उदयपुर) ने की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार के कार्यालयों, बैंकों एवं सार्वजनिक उपक्रमों में राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग की समीक्षा करना रहा। इस दौरान सदस्य कार्यालयों द्वारा विगत छह माह में हिंदी उपयोग की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। राजभाषा नियमों की अनुपालना के तहत केंद्रीय सरकारी कार्यालयों, बीमा कंपनियों एवं बैंकों के प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई।
बैठक में आगामी छह माह की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा करते हुए हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें राजभाषा विभाग द्वारा जारी वार्षिक कार्यक्रम की अनुपालना, वार्षिक राजभाषा समारोह एवं कवि सम्मेलन का आयोजन, केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो नई दिल्ली द्वारा उदयपुर में अनुवाद प्रशिक्षण, केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान द्वारा हिंदी टंकण प्रशिक्षण, राजभाषा पत्रिका का प्रकाशन तथा छह माही रिपोर्ट का समय पर प्रेषण शामिल है।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. रण सिंह ने कहा कि राजभाषा हिंदी का प्रयोग केवल औपचारिकता न होकर दैनिक कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने सभी कार्यालयों से संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन के प्रति गंभीरता से कार्य करने का आह्वान किया।
नराकास के सचिव श्री पालीवाल ने विगत छमाही में उत्कृष्ट योगदान के लिए आयकर कार्यालय, खान सुरक्षा महानिदेशालय, पंजाब नेशनल बैंक, रेल प्रशिक्षण संस्थान एवं भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के कार्यालय प्रमुखों की सराहना की। साथ ही भारतीय जीवन बीमा निगम को संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन में पुरस्कार प्राप्त करने पर बधाई दी।

बैठक के अंत में उत्तर क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, नई दिल्ली को आवश्यक कार्रवाई हेतु सूचित किया गया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के कार्यवाहक कार्यालय प्रमुख डॉ. चित्तरंजन मंडल द्वारा प्रस्तुत किया गया। बैठक में सभी सदस्य कार्यालयों को निर्धारित राजभाषा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सक्रिय प्रयास करने के लिए प्रेरित किया गया।

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