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40 से ज्यादा ठेले अवैध रूप से खड़े हो गए, तब तक क्या कर रहे थे निगम के अधिकारी? कार्रवाई पर फिर उठे सवाल, आखिर कब तक आंख मूंदकर बैठे रहेंगे जिम्मेदार

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24 न्यूज अपडेट.उदयपुर। नगर निगम के अधिकारी ऐसा लगता है कि लंबी प्रशासनिक नींद लेकर अचानक उठते हैं और पता चला है कि जो अतिक्रमण रोकने का काम उनको दिया गया है उसमें विफल रहे और फिर किसी राजनीतिक चाबुक के चलते निकल पड़ते हैं कार्रवाई करने। अचानक हड़कंप मचता है और सुर्खियां बनती हैं कि बड़ी संख्या में सड़क से अतिक्रमण हटाए गए। आज भी निगम के दस्ते नेएक बार फिर नींद से जागते हुए कार्यवाही करते हुए उदयपुर शहर के हॉस्पिटल रोड स्थित ठेला संचालकों को हटाया। करीब 40 से ज्यादा ठेलों को जब्त किया गया। नगर निगम का दस्ता आज सुबह अचानक मौके पर आया और नगर निगम के कर्मचारियों को देखकर ठेला संचालक हैरान रह गए। बिना कोई नोटिस के ही यह कार्यवाही की गईं। ठेला संचालकों का कहना ही को कोर्ट में पहले से केस चल रहा है और कोर्ट से स्टे लिया हुआ है लेकिन निगम के अधिकारी किसी बात को सुनने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि हॉस्पिटल के बाहर का क्षेत्र नो वेंडिंग जोन है व कई बार हटाने के बाद भी यहीं ठेला लगाते है। इनके लिए अलग से व्यवस्था को गई है। अब सवाल यह उठता है कि इतने सारे ठेले एक बार में तो नहीं लगे होंगे। यदि नो वेंडिंग जोन है तो उसकी निगरानी की जिम्मेदारी किन-किन कर्मचारियों की है उसने नाम भी कार्रवाई के साथ ही सार्वजनिक किए जाने चाहिए। निगम के दल-बल का जो कार्रवाई में खर्चा आया है वह उनसे भी वसूला जाना चाहिए क्योंकि जब सड़कों पर अतिक्रमण हो रहे थे तब या तो वे सो रहे थे या किसी आर्थिक या राजनीतिक दबाव के चलते चुप बैठे हुए थे। अगर नियमित गश्त होती, नियमित निगरानी होती तो ठेले लगना संभव ही नहीं था। अभी जनता में यह पर्सेप्शन जा रहा है कि निगम के वे सभी अधिकारी जिनके जिम्मे अतिक्रमण रोकना है वो राजनीतिक व प्रशासनिक दबाव में काम कर रहे हैं, एक-एक करके ठेलों को या तो लगने देते हैं या खुद उनकी शह पर ठेले लगते हैं और उसके बाद जब कोई बडा दबाव आता है तो वे खुद ही एकमुश्त हटाने निकल पड़ते हैं। शहर के कई इलाकों में यही हाल है और अफसरों-कार्मिकों की अनदेखी के चलते इस तरह की कार्रवाइयों में जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा खर्च हो रहा है।

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