Site icon 24 News Update

सुशील जैन की कलम से : सलूंबर में नोटा नहीं होता तो भाजपा के हाथ से निकल जाता ‘अमृत-काल’, आज खुश तो बहुत होंगे ‘रघुवीर’

Advertisements

उदयपुर। इस बार का चुनाव बरसों तक याद रहेगा। उप चुनाव इसलिए याद किया जाएगा क्योंकि नोटा के सोटा ने इस बार बाप को परास्त कर दिया तो भाजपा को नया जीवन दे दिया। अगर नोटा नहीं होता तो भाजपा से उसका अमृत काल छिन जाता। अर्थात भाजपा अपने पूर्व विधायक अमृतलाल मीणा की सीट कां गंवा बैठती। सलूंबर में भाजपा की शांता मीणा ने बाप के जितेश को अंतिम रांड में शिकस्त देकर चुनाव जीत लिया। यह कमाल कैसे हुआ, इससे सभी चकित है।ं कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही। बाप आखिरी तक लगातार मुकाबले में आगे रही लेकिन चार अंतिम राउंड भारी पडे और आखिरी राउंड में भाजपा ने जीत दर्ज कर ली। इसमें 1285 वोटों से भाजपा विजयी रही। इधर, नोटा को 2560 वोट मिले। अगर ये वोट बाप को मिल जाते तो नतीजा पलट जाता। इसके अलावा निर्दलीय मैदान में नहीं होते तो 5591 वोट होते व यह भी जीत का फैसला कर लेते। अगर कांग्रेस प्रत्याशी नहीं होता तो बाप को 1 लाख 9903 वोट मिल जाते जीत का अंतर 25 हजार 475 हो जाता। अर्थात यदि साझा समीकरण बैठ जाता तो सीट एलायंस के खाते में चली जाती। उधर, कांग्रसे भितरघात की शिकर हुई। रघुवीर मीणा के नाराज होने से वोट कट गए। दुविधा के चलते वे अंतिम दो दिन प्रचार के लिए आए वो भी सक्रिय नहीं हुए। उनकी नाराजगी भी हार का प्रमुख कारण है। इसके साथ ही यह कहा जा रहा है कि रघुवीर मीणा की राजनीति का भी लगभग अंत होता दिख रहा है। भाजपा आंतरिक फूट के बावजूद एकजुट रही। उसने सलूंबर के जिले के खास मुद्दे को मैनेज कर लिया। मगर यह जीत भाजपा के लिए सबक है कि केवल सहानुभूति के सहारे नहीं चला जा सकता। उसके लिए अच्छा प्रत्याशी होना भी जरूरी है। इस जीत के लिए भाजपा ने साम, दाम दंड भेद और प्रशासनिक मशीनरी की दरियादिली का शानदार उपयोग किया। भाजपा को अंतिम प्रचार के समय पता लग गया था कि एक एक वोट पर पहरा है। ऐसे में उन्होंनें अपनी आर्थिक आमद बढ़ा दी व सारे घोडे खुले छोड़ दिए। बाप की तारीफ करनी होगी कि उसने इतने कम संसाधन में ऐसी प्रभावशाली पार्टी का मुकाबला तो किया ही, उसको नाको चने चबवा दिए। लगभग हार की कगार पर खडा कर दिया। सलूंबर की जीत में एक और फेक्टर बताया जा रहा है कि अंदरखाने कांग्रेस को भी एक अन्य दल ने मजबूत करने का काम किया। जो कांग्रेसी वोट मिले हैं वे भी एक तरह से बाप को हराने का ही काम करते नजर आए।

Exit mobile version