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24 News Update उदयपुर, 25 जून। महावीर साधना एवं स्वाध्याय समिति अंबामाता में चल रही धर्मसभा में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेन सूरीश्वर महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि सच्चा सुख भौतिक पदार्थों के संग्रह में नहीं, बल्कि आत्मा के अनंत गुणों की प्राप्ति में है। उन्होंने कहा कि जैसे प्यासा व्यक्ति खारे पानी से तृप्त नहीं हो सकता, वैसे ही भौतिक सुखों की तलाश अंतहीन दुख का कारण बनती है। तीर्थंकरों ने भी राजसुख त्याग कर आत्मिक साधना के बल पर मोक्ष का मार्ग दिखाया। सभा में राजेश जावरिया, समिति अध्यक्ष प्रकाश चंद्र कोठारी, फतेह सिंह मेहता, ललित धूपिया, गजेन्द्र, जसवंत सिंह सुराणा, रणजीत सिंह सहित समिति के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।

