24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। अब तक तो यही इंप्रेशन था कि विधानसभा में सवाल उठाया और तुरंत कार्रवाई हो जाती है। अफसर दौड़े चले आते हैं, वे विधानसभा के वक्त चौबीसों घंटे चौकस रहकर काम करते हैं। तुरंत जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होती है। हर सवाल को गंभीरता से दर्ज किया जाता है। खुद संबंधित मंत्रीजी उस पर नजर रखते हैं। लेकिन लगता है अब धारणा बदलनी पड़ेगी। यहां भी लेटलतीफी हावि दिखाई दे रही है। ये कैसे हो सकता है जनता का नुमाइंदा सवाल पूछे और विधानसभा से पांच साल तक कोई जवाब ही ना मिले। ये तो हद की भी हद है। उस पर भी संबेधितों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो व विधायक को अपने कार्यकाल के गुजर जाने के बाद पूछना पड़े कि मेरे सवालों का जवाब दो……..दो ना। तो स्थितियां इससे बदतर और क्या होगी? यह मामला मावली के पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी से जुड़ा है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को जोशी ने पत्र लिखकर ध्यान दिलाया है कि विगत पन्द्रहवीं विधानसभा में सदस्य के नाते पूछे गये 37 विधानसभा प्रश्नों का उत्तर उन्हें आज तक नहीं मिला है।
पूर्व विधायक जोशी ने पत्र में लिखा है कि विधानसभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, क्षोभ का विषय है कि उनके कुछ प्रश्न चार वर्ष से लम्बित है। यह स्थिति बताती है कि अधिकारी विधानसभा के प्रश्नों को कितनी गंभीरता से लेते है। जोशी ने पत्र में लिखा है कि समय पर उत्तर मिलने की व्यवस्था हो, जिससे प्रश्न व प्रक्रिया की उपादेयता बनी रहे। पत्र में इस विलम्ब के लिये जिम्मेदार कार्मिकों पर कार्यवाही की मांग भी की गयी है।
विधानसभा है या भूल-भुलैया, गजब की पोलपट्टी : पूर्व विधायक जोशी देवनानी से बोले-मेरे सवालों का जवाब दो…….दो ना!!!! जोशी को पिछली विधानसभा के 37 प्रश्नों के उत्तर आज तक नहीं मिला

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