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मेवाड के इतिहास में सकल जैन श्रीसंघ व-ुनवजर्यातप मंडल द्वारा पहली बारभव्य प्रथम पारणे का आयोजन , 51 तपस्वियों ने आगामी व-ुनवजर्यातपके लिए किया पहला पारणा

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कविता पारख

24 news update निम्बाहेडा । रविवार को मेवाड के इतिहास में पहली बार सकल जैनश्रीसंघ व-ुनवजर्यातप मंडल द्वारा आगामी व-ुनवजर्या तप आराधको के भव्य पारणे का भव्य आयोजन नगर के मध्य स्थित चन्दन बाला भवन में आयोजित किया जहां 51 तपस्वियों ने आगामी व-ुनवजर्यातप के लिए किया पहला पारणा किया। आयोजन समिति ने बताया कि प्रातः 7 बजे सभी तपस्वियों को -सजयोल नगाड़ों के साथ जैन मन्दिर से जुलेस के रूप में -रु39याहर के मध्य चन्दन बाला भवन लाया गया जिसमें सकल जैन संघ के सेकडो की तादाद में महिला पुरू-ुनवजया व समाजजन द्वारा जुलुस के रूप में चंदनबाला भवन लाया गया । जहां प्रथम पारणा के लाभार्थी जैसलमेरिया जिंदाणी परिवार द्वारा एवं जैन समाज की महिला एवं पुरु-ुनवजया द्वारा किया सभी तपस्वियों का बहुमान किया गया वही सकल जैन श्रीसंघ व-ुनवजर्यातप मंडल एवं सकल जैन संघ के वरि-ुनवजयठ सदस्यों द्वारा लाभार्थी जैसलमेरिया जिंदाणी परिवार को मेवाड़ी पगड़ी, श्रीफल परिवार माला व उपर्णा पहना कर अभिनंदन किया। सकल जैन श्रीसंघ ने बताया कि मेवाड़ प्रांत में यह पहला अवसर जब की वि-ुनवजर्यातप करने वाले सभी तपस्वियों के पहले पारणा का आयोजन भव्यतम रूप से किया गया है। सकल जैन श्रीसंघ व-ुनवजर्यातप मंडल ने बताया कि आगामी सभी पारणा की व्यवस्था भी व-ुनवजर्यातप मंडल द्वारा ही की जाएगी जिसमें सकल जैन संघ के सभी ग्रुप महिला मंडल आदि का सेवा कार्य के लिए सहयोग लिया आग्रह किया जाएगा। रविवार को प्रथम पारणे के आयोजन में अखिल भारतीय राजेंद्र जैन महिला परि-ुनवजयाद द्वारा सेवा सहयोग दिया गया। सभी आराधको को प्रभावना सुरेंद्र चौधरी परिवार,विमल जिंदाणी परिवार, सुन्दर सिंह बक्षी परिवार.बसंत लो-सजय़ा द्वारा दी गई वहीं सभी आराधकों को थाली सेट की प्रभावना वीरानी परिवार द्वारा दी गई। क्यो करते है वि-ुनवजर्यातप ? जैन समुदाय के प्रथम तिर्थकर परमात्मा ऋ-ुनवजयाभदेव स्वामी ने चौद वदि 8 के दिन संयम ग्रहण किया था तत्प-ुनवजयचात करीब एक व-ुनवजर्या और डे-सजय महिना लगभग उन्हें आहार उपलब्ध नहीं हुआ क्योकी पूर्वजन्म में किसान के भव में उन्होंने एक बैल के मुख पर छींका बांधा था व भुल व-रु39या उसे खोलना भूल गये थे, इस कारण वह बैल भूखा रह गया था । उस बैल ने 400 निसासे डाले थे। उसी के परिणामस्वरुप परमात्मा को अंतराय कर्म का बंधन हुआ और ४०० दिनों तक -रु39याद्ध आहार उपलब्ध नहीं हुआ। कर्म परिपाक पूर्ण होने पर अक्षय तृतीया को श्रेयांस कुवंर के हाथों गन्ने के रस के साथ उनका पारणा संपन्न हुआ । परमात्मा के इस तप की स्मृति में व-ुनवजर्यातप की आराधना होती है। लगातार उपवास करने की क्षमता असंभव है। अतः एकान्तर उपवास द्वारा यह तप किया जाता है। उत्कृ-ुनवजयटः यह तप 8०० दिनों में संपन्न होता है। कई आराधक ४०० दिनों तक भी यह तप करते हैं।

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