24 न्यूज अपडेट. चित्तौड़गढ़। सांवलिया सेठ मंदिर में एक अद्वितीय घटना देखने को मिली, जब भक्त छोटूलाल वाल्मीकि ने अपनी मन्नत पूरी होने के बाद भगवान को चांदी का रावण भेंट किया। यह रावण का पुतला 141 ग्राम चांदी से बना हुआ है, जिसे छोटूलाल ने अपनी व्यक्तिगत आस्था और अनुभवों से प्रेरित होकर भेंट किया। बारिश रुकने की मन्नत मांगी थी उन्होंने। छोटूलाल वाल्मीकि, जो दशहरा मेलों के लिए रावण के पुतले बनाते हैं, को 2024 के निंबाहेड़ा मेले के दौरान भारी बारिश का सामना करना पड़ा। उन्होंने भगवान सांवलिया सेठ से मन्नत मांगी कि यदि बारिश रुक जाए, तो वे चांदी का रावण भेंट करेंगे। उनकी मन्नत पूरी हुई, 3 घंटे तक बारिश रुकी, और वे अपना काम पूरा कर पाए। रविवार को छोटूलाल ने सांवलिया सेठ के दरबार में 141 ग्राम चांदी से बना रावण का पुतला भेंट किया। मंदिर मंडल के सदस्य संजय मंडोवरा ने इसे स्वीकार कर परंपरा के अनुसार छोटूलाल का सम्मान किया। छोटूलाल पिछले 12 सालों से रावण के पुतले बना रहे हैं। 2016 में उन्हें जयपुर में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे हर साल करीब 10 बड़े रावण के पुतले बनाते हैं, जिनमें से कई प्रमुख मेलों के लिए होते हैं। एक समय था जब छोटूलाल को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनकी पत्नी किरण ने उन्हें रावण पुतला बनाने के लिए प्रेरित किया, और इस काम ने उनकी जिंदगी बदल दी। छोटूलाल का कहना है कि उनके जीवन में जो भी सफलता मिली है, वह सांवलिया सेठ की कृपा का परिणाम है। वे हर महीने सांवलिया सेठ के दर्शन के लिए आते हैं, और उनकी ट्रांसपोर्ट कंपनी की गाड़ियों पर सांवलिया सेठ का नाम अंकित है। चित्तौड़गढ़ के मंडफिया स्थित सांवलिया सेठ का मंदिर भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि लोगों की व्यक्तिगत कहानियों और आस्था से जुड़ी घटनाओं के लिए भी प्रसिद्ध है।
महिमा अपरम्पार : सांवलिया सेठ ने बारिश रोकने की मन्नत पूरी की तो भक्त ने चढ़ाया 141 ग्राम का चांदी का रावण का पुतला, पत्नी की प्रेरणा से बनाने लगे रावण के पुतले और बदल गई जिंदगी

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