बॉलीवुड अभिनेत्री रह चुकी ममता कुलकर्णी बीते कुछ समय से आध्यात्मिक जीवन जी रही हैं। उन्होंने 24 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में महामंडलेश्वर का पद ग्रहण किया था और श्रीयामाई ममता नंद गिरि नाम प्राप्त किया। लेकिन महज 17 दिनों के अंदर ही उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया, और फिर दो दिन बाद इसे वापस भी ले लिया। यह मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं था, बल्कि किन्नर अखाड़े, संत समाज और हिंदू परंपराओं से जुड़े कई विवादों को जन्म दे गया।
पहला चरण: महामंडलेश्वर पद ग्रहण (24 जनवरी 2025)
महाकुंभ में आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की अगुवाई में किन्नर अखाड़े ने ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद सौंपा। यह अखाड़ा 2015 में किन्नर समुदाय के लिए स्थापित किया गया था, और यह पहली बार था जब कोई महिला महामंडलेश्वर बनी।
➡ इस फैसले को लेकर कई विवाद उठे:
- किन्नर अखाड़ा किन्नरों के लिए है, तो महिला को यह पद क्यों दिया गया?
- क्या ममता का अतीत, विशेष रूप से उनका बॉलीवुड करियर और कथित अंडरवर्ल्ड लिंक, इस पद के लिए उपयुक्त था?
दूसरा चरण: इस्तीफा (10 फरवरी 2025)
ममता ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अखाड़े के अंदर आपसी झगड़ों और गुरु डॉ. लक्ष्मी त्रिपाठी पर लगे आरोपों से वह बेहद दुखी थीं।
➡ मुख्य बातें:
- किन्नर अखाड़े में अंदरूनी कलह चल रही थी।
- उन्होंने कहा, “मैं 25 साल से साध्वी हूं, और आगे भी रहूंगी। लेकिन महामंडलेश्वर पद मेरे लिए सही नहीं है।”
- कई शंकराचार्यों और संतों ने उनके महामंडलेश्वर बनने का विरोध किया था।
तीसरा चरण: इस्तीफा नामंजूर (12 फरवरी 2025)
दो दिन बाद, ममता कुलकर्णी ने इस्तीफा वापस ले लिया। उन्होंने फिर एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि गुरु लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
➡ ममता ने कहा:
- “मैंने भावनाओं में बहकर इस्तीफा दिया था, लेकिन मेरे गुरु ने इसे नामंजूर कर दिया।”
- “अब मैं अपना पूरा जीवन सनातन धर्म और किन्नर अखाड़े के लिए समर्पित करूंगी।”
- उन्होंने स्पष्ट किया कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और वह अखाड़े में बनी रहेंगी।
ममता कुलकर्णी पर विवाद और आरोप
1. D-कंपनी से कथित संबंध और ड्रग्स केस
- जगद्गुरु हिमांगी सखी ने आरोप लगाया कि ममता के अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से संबंध हैं।
- उनके नाम 2000 के दशक में एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट में आया था।
2. पैसे देकर महामंडलेश्वर बनने का आरोप
- कहा गया कि ममता ने 10 करोड़ रुपये देकर महामंडलेश्वर पद खरीदा।
- इस पर उन्होंने सफाई दी:
- “मुझसे 2 लाख रुपये मांगे गए थे, जो मेरे पास नहीं थे। तब महामंडलेश्वर जय अंबा गिरी ने अपनी जेब से पैसे दिए थे।”
- “10 करोड़, 4 करोड़ या 3 करोड़ जैसी बातें गलत हैं।”
3. बाबा रामदेव और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का विरोध
- बाबा रामदेव ने कहा, “कोई एक दिन में संत नहीं बन सकता, इसके लिए तपस्या और साधना जरूरी होती है।”
- धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बोले, “सिर्फ बाहरी प्रभाव से किसी को भी महामंडलेश्वर नहीं बनाया जा सकता।”
4. ऋषि अजय दास ने ममता और लक्ष्मी त्रिपाठी को हटाने की मांग की
- किन्नर अखाड़े के एक और संत ऋषि अजय दास ने कहा कि ममता और लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को महामंडलेश्वर पद से हटा दिया गया है।
- उन्होंने कहा, “यह कोई बिग बॉस शो नहीं है, जहां किसी को एक महीने के लिए महामंडलेश्वर बना दिया जाए।”
ममता कुलकर्णी का जवाब
➡ “मैंने 25 साल चंडी की आराधना की है। किसी हिमालय जाने की जरूरत नहीं, पूरा ब्रह्मांड मेरे सामने है।”
➡ “कुछ संतों में अहंकार है और वे आपस में झगड़ रहे हैं।”
➡ “मैं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का सम्मान करती हूं, लेकिन हिमांगी को नहीं जानती।”
निष्कर्ष: यह विवाद क्या दर्शाता है?
1️⃣ किन्नर अखाड़े में आंतरिक संघर्ष
- यह विवाद दिखाता है कि किन्नर अखाड़े में आपसी सहमति और नेतृत्व को लेकर संघर्ष चल रहा है।
2️⃣ महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया पर सवाल
- संत समाज में महामंडलेश्वर बनने के लिए वर्षों की साधना जरूरी मानी जाती है, लेकिन ममता के मामले में यह प्रक्रिया विवादों में रही।
3️⃣ संत समाज में महिलाओं की भूमिका पर बहस
- क्या कोई महिला किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बन सकती है? यह सवाल इस पूरे विवाद के केंद्र में रहा।
क्या ममता कुलकर्णी महामंडलेश्वर बनी रहेंगी?
👉 अब जब उन्होंने पद वापस ले लिया है, तो देखना होगा कि किन्नर अखाड़े और संत समाज में उनके प्रति स्वीकृति बढ़ती है या विवाद जारी रहता है।

