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*मनुष्यों के लिये लोभ ही सर्वनाश करने वाला राक्षस है !*

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*निर्दोल चातुर्मास- 2024*



*पुण्य सम्राट गुरुदेव श्री जयंत सेन सुरिश्वर जी म.सा.के शिष्य, वर्तमान गच्छाधिपति श्री नित्यसेन सुरिश्वर जी म.सा. एवं आचार्य देवेश श्री जयरत्न सुरिश्वर जी म.सा. के आज्ञानुवर्ती मुनिराज डॉ. सिद्ध रत्न विजय जी म.सा., मुनि प्रवर श्री विद्वत रत्न विजय जी म.सा.आदि ठाना – ४ ने अपने प्रवचन में कहा कि जितना लाभ होता है, उतना ही अधिक लोभ होता है। लाभ होने से लोभ बढ़ता ही जाता है। दो मासे सुवर्ण होने पर सन्तोष हो सकता है, वह करोड सुवर्ण होने पर भी अपूर्ण ही रहता है। लाभ कितना भी अधिक हो, उससे लोभ घटता नहीं। मनुष्यों के लिये लोभ ही सर्वनाश करने वाला राक्षस है। लोभ ही प्राण लेने वाला विष-जहर है।* *लोभ ही मद करने वाली पुरानी मदिरा है। सब दोषों का स्थान एकमात्र निन्दनीय लोभ ही है। मनुष्यों का शरीर तृष्णा को कभी नहीं छोड़ सकता।* *पाप बुद्धि मनुष्य कदापि सुन्दरता नहीं प्राप्त कर सकता। वृद्धावस्था ज्ञान को नहीं बढ़ाती। इसलिए मनुष्यों का शरीर निन्दनीय हो जाता है। फिर भी लोग तृष्णा नहीं छोड़ते। ज्ञानीयो ने कहा है लोभ का त्याग परिग्रह परिमाण वृत्त है। जो व्यक्ति इस को धारण करता है वह लोभ के पाप से दूर रहता है। इसलिए कहा है लोभ का बाप पाप है और पाप सर्वनाश की और ले जाकर केवल मात्र दुःख-दर्द को ही प्राप्त कराता है।*
*आज 27 सितंबर 2024 को पूज्य गुरु भगवंतो के दर्शनार्थ- वंदनार्थ मध्यप्रदेश के महिदपुर सीटी से गुरुभक्त श्री मुकेश जी बाठिया एवं उनकि धर्मपत्नी श्रीमती मिनाली जी बाठिया व गुन्टूर से धर्माराधिका सरला बहन एवं पुत्र सन्दीप जी आए। आज गुरु आरती का लाभ पी.एल. ग्रुप के जयन्तिलाल जी भण्डारी परिवार द्वारा लिया गया। प्रभावना का लाभ पी. एल.ग्रुप,गुन्टूर एवं मुकेश जी बाठिया महिदपुर सीटी (म.प्र.) द्वारा लिया गया। श्री संघ निर्दोल कि और से बहुमान के लाभार्थी परिवार द्वारा पधारे हुए गुरु भक्तो का बहुमान किया गया।*

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