24 न्यूज अपडेट. ब्यूरो। केरल उच्च न्यायालय में अधिवक्ता संघ ने भीषण गर्मी को देते हुए हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वे वकीलों को गाउन ना पहनने की छूट दें। इस पर हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार कर लिया व छूट दे दी। हाईकोर्ट से राहत मिल जाने के बाद सजिला न्यायपालिका के न्यायालयों में आने वाले अधिवक्ताओं के लिए भी काले कोट और गाउन के उपयोग को वैकल्पिक बनाते हुए, बैंड के साथ सफेद शर्ट पहनने की अनुमति दे दी है। सोशल मीडिया साइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट में भी उपस्थित होने वाले वकीलों के लिए गाउन पहनना वैकल्पिक रहेगा। प्रस्ताव केरल उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के एक अनुरोध पर विचार करते हुए पारित किया गया है। इसमें कहा गया था कि तेज गर्मी और राज्य भर में अधिवक्ता समुदाय के सामने आने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए गाउन पहनने से छूट देने की मांग की गई थी।यह निर्देश 31 मई 2024 तक लागू रहेगा। आपको बता दें कि इन दिनों तेज गर्मी की वजह से गाउन पहनने में वकीलों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। गर्मी के मारे कोर्ट में पैरवी करना मुश्किल हो गया था। जहां तक काले कोट का सवाल है तो वकीलों के काला कोट पहनने की परंपरा 1327 में एडवर्ड तृतीय द्वारा वकालत शुरू करने के समय की कही जाती है। तब न्यायाधीशों के लिए अलग प्रकार की पोशाक तैयार की जाती थी। हालांकि उस समय वकीलों के लिए काले रंग की पोशाक नहीं होती थी। वकील लाल कपड़े और भूरे रंग के गाउन पहना करते थे। जज के लिए सफेद रंग की विग अनिवार्य होती थी। वर्ष 1637 में वकील फुल लेंथ गाउन पहनने लगे। कहा यह भी जाता है कि 1694 में क्वीन मैरी की चेचक से मौत के बाद किंग विलियम्स ने सभी न्यायाधीशों और वकीलों को शोक मनाने व काले गाउन में इकट्ठा होने का आदेश दिया। इसके बाद से वकील काला कोट पहनने लग गए जो परम्परा आज तक चली आ रही है।
भीषण गर्मी ने चलते केरल हाईकोर्ट ने वकीलों को दी गाउन ना पहनने की छूट

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