उदयपुर, 23 मई, 2024। भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की ओर से आयोजित एक दिवसीय ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली, इतिहास लेखन तथा दर्शन’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज 23 मई को भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय सभागार में सरस्वती वन्दना और संस्थागीत के साथ हुआ। संगोष्ठी के मुख्यवक्ता प्रो. शशिकांत भट्ट ने उद्बोधन देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की अपनी ऐतिहासिक भूमिका रही है। तक्षशिला, नालन्दा, वल्लभी, आदि ऐसी श्रेष्ठ संस्थाए रही हैं, जहां विद्यार्थियों का कुलपति के द्वारा साक्षात्कार के बाद ही प्रवेश होता था। भारत की ज्ञान की ऐतिहासिक पद्धति एक श्रेष्ठ नागरिक के निमार्ण में सहायक रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल ही भारतीय जीवन मूल्यों, संस्कारों की पुनस्र्थापना के साथ ही एक सच्चे मानव का विकास करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य विद्यार्थी को उपाधि प्रदान करना नही है, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वागीण विकास करना है। उन्होंने नामकरण की वैज्ञानिक विधि के सन्दर्भ में प्रासंगिक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं और कहा कि संस्कृत के ज्ञान भण्डार को पुनः प्रचारित करने की आवश्यकता है।दूसरे मुख्य वक्ता के रूप में गुजरात विश्वविद्यालय के प्रो. अरुण वाघेला ने भारतीय इतिहास के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता प्रतिपादित करते हुए कहा कि इतिहास लेखन की परंपराओं पर दृष्टिपात किया जाना चाहिए। इतिहास में बहुत सी ऐसी घटनाएं हैं, जिसमें कार्यकारण संबंध नहीं मिलता। भारत की भौगोलिक विशेषता विविधता से युक्त है और यह सत्य है कि वातावरण के बदलाव ने शिक्षा पद्धति को नष्ट कर दिया है। उन्हांेने कहा कि इतिहास लेखन में मौखिक परंपराओं को ध्यान में रखना आवश्यक है। भारत में कालगणना की अनेक पद्धतियां हैं। इसी तरह अनेक लिपियां हैं। भारत की इतिहास लेखन की परंपरा अन्य देशों की अपेक्षा अधिक सुदृढ़़ है।उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि विद्या प्रचारिणी सभा के मंत्री डाॅ. महेन्द्र सिंह राठौड़ ने उद्बोधन देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मुख्य उद्देश्य बेहतर मानव का निमार्ण करना है। भारतीय संस्कृति को जानना और अपने जीवन में उतारना ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य है। उन्हांेने कहा कि बेहतर समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए संवाद की गतिशीलता बनी रहनी चाहिए।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय चैयरपर्सन प्रो. (कर्नल) शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि वास्तविक ज्ञान वही है जो मानवीय मुल्यों का विकास करे। आज सबसे बड़ी चिन्ता का विषय यह है कि अच्छे संस्कारों को आने वाली पीढ़ी में अन्तरण किया जाए। भारतीय ज्ञान परंपरा की अनेक विशेषताओं को उद्घाटित करते हुए कहा कि भारतीय युवाओं को सारगर्भित ज्ञान दर्शन से परिचित कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में आयोजित इस संगोष्ठी से बेहतर निष्र्कष प्राप्त होंगे।एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न हिस्सों से 20 से अधिक प्रतिभागियों ने पत्रवाचन किए। इस अवसर पर पोस्टर प्रस्तुति भी रखी गई।इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत संकाय अधिष्ठाता डाॅ. शिल्पा राठौड़ द्वारा किया गया और संगोष्ठी की रूप रेखा आयोजन सचिव डाॅ. पंकज आमेटा ने प्रस्तुत की। इस अवसर पर वित्तमंत्री शक्ति सिंह राणावत व कार्यकारिणी सदस्य कैप्टन गजेन्द्र सिंह शक्तावत सहित देशभर के प्रसिद्ध इतिहासविज्ञ उपस्थित थे। जिनमें डाॅ. जीवन सिंह खडकवाल, डाॅ. जेके औझा, डाॅ. मनिष श्रीमाली, डाॅ. हेमेन्द्र चैधरी, डाॅ. प्रतिभा शर्मा, डाॅ. अशोक सचदेव, आदि थे। इसके साथ ही विज्ञान संकाय अधिष्ठाता डाॅ. रेणु राठौड़, डीन पी.जी स्ट्डीज डाॅ. प्रेम सिंह रावलोत, विभिन्न संकाय के सदस्य, प्रतिभागिगण उपस्थित थे। संगोष्ठी सह समन्वयक डाॅ. नरेन्द्र सिंह राणावत ने धन्यवाद दिया और बताया की एक दिवसीय संगोष्ठी हाईब्रीड मोड पर संपन्न हुई। डाॅ शिल्पा राठौड़अधिष्ठाता Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सवीना पुलिस ने पकड़ा अर्न्तराज्यीय चारपहिया वाहन चोर गिरोह, काट कर बेचने वाले थे चोरी की स्कॉर्पियो, स्विफट डिजायर सहित दो वाहन जब्त नानी बाई रो मायरो कथा पांडाल में ठाकुरजी के भजनों पर झूम उठे श्रद्धालु, महाप्रसादी के साथ हुआ समापन