स्वास्थ्य सेवाओं को ठीक नहीं किया जाएगा तब तक नीम-हकीमों का कारोबार प्रशासनिक मिलीभगत से चलता रहेगा। बरसों से छापे पड़ रहे हैं, पकड़े जा रहे हैं मगर फिर भी बरसों वही आलम है। साल में एकाध कार्रवाई करने से कुछ नहंीं होने वाला है। केवल दस्तूर पूरा होने वाला है। ऐसा कैसे हो जाता है कि एक पूरा अस्पताल का सेटअप तैयार हो जाता है। मरीज देखे जाते हैं, भर्ती किए जाते हैं और बरसों बाद जांच में सामने आता है कि डाक्टर के पास डिग्री तक नहीं है। यह मिलीभगत का खेल है जिसमें असली दोशी तो वे लोग हैं जो इन लोगों से रिश्वत लेकर इनको अभयदान दे रहे हैं, उनको भी पकडऩा जरूरी है। बहरहाल खबर ये है कि वास्थ्य विभाग ने दामडी में एक फर्जी दवाखाने को सील करते हुए दोवड़ा थाने में रिपोर्ट दी है। बिना डिग्री के झोलाछाप यहां पर दवाखाना चला रहा था। फर्जी दवाखाने को सील कर दिया है। दोवड़ा थाने में भी रिपोर्ट दी गई है। सीएमएचओ डॉ. अलंकार गुप्ता ने बताया कि चिकित्सा विभाग के एसीएमएचओ डॉ. विपिन मीणा, बीसीएमओ दोवडा डॉ. वैभव परमार, चिकित्सा अधिकारी दामडी डॉ. गिरिश ननोमा, औषधि नियंत्रण विशाल जैन व डीपीओ डॉ. किशोर लाल वर्मा की टीम दामडी पहुंची। बाबुल बोस इस क्लिनिक पर मरीजों का इलाज कर रहा था। झोलाछाप से डिग्री मांगी गई, लेकिन कोई दस्तावेज या डिग्री नहीं मिली। क्लिनिक में एलोपेथी दवा मिली। टीम ने दवाइयों का लाइसेंस मांगा, लेकिन डॉक्यूमेंट नहीं था। स्वास्थ्य विभाग ने फर्जी दवाखाने को सील कर दिया है। वहीं, दोवड़ा थाने में भी रिपोर्ट दी गई है।
बिना डिग्री के इलाज कर रहे फर्जी डाक्टर का दवाखाना सीज
डूंगरपुर, जब तक सरकारी स्तर पर

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