24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। नए साल में 80 वार्डों में चुनाव के प्रस्ताव पर बर्फ गिरती नजर आ रही है। 55 साल बाद निगम की सीमाओं का विस्तार कर जिन 33 गांवों को जोडकर 10 नए वार्ड बनाने व 17 किलोमीटर के विस्तार की जो बात की गई थी वह अब ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है। जोधपुर हाईकोर्ट में आज दो मामलों की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण ऑब्जर्वेशन आया और राज्य सरकार की ओर से भी सहमति जता दी गई कि अगली सुनवाई तक परिसीमन को आगे नहीं बढाया जाएगा। राजस्थान हाईकोर्ट ने संवैधानिक प्रावधानों और पेरा अधिनियम के उल्लंघन को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुनवाई की। अब गिर्वा के गांवों को इसमें शामिल नहीं किया जा सकेगा। पेसा कानून और टीएसपी एरिया इसमें प्रमुख तर्क रहे जिस पर कोर्ट में चर्चा की गई। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक पारीक ने 24 न्यूज अपडेट को बताया कि टीएसपी आरक्षण पर असर हो रहा है, इससे पेसा कानून का उल्लंघन हो रहा है और कई कानूनों की अवहेलना की जा रही है। राज्य सरकार को कोई अधिकार नहीं है कि वो कानून को थोप सके। विस्तार होना चाहिए मगर कानून के अनुसार। ना तो ग्राम सभाओं से पूछा गया ना चर्चा की गई। खुद ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने भी इसे अनुचित बताया है। ऐसे में अब नया विस्तार खटाई में पड सकता है। न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति मुन्नुरि लक्ष्मण ने डीबी सिविल रिट याचिका संख्या 700/2025, मथुरा लाल बनाम राजस्थान राज्य पर सुनवाई की। यह याचिका स्वायत्त शासन विभाग, जयपुर द्वारा 26.12.2024 को जारी अधिसूचना को चुनौती देती है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता, अभिषेक पारीक, ने तर्क दिया कि अधिसूचना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 जेड सी का उल्लंघन करती है और पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा अधिनियम) के प्रावधानों के विपरीत है। मथुरालाल बनाम राज्य सरकार में नोटिफिकेशन को चेलेज किया गया है। 26 दिसंबर के राज्य सरकार नोटिफिकेशन को चैलेंज किया गया है।
याचिकाकर्ता ने निम्नलिखित संवैधानिक और कानूनी उल्लंघनों को रेखांकित किया
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता, अभिषेक पारीक ने 24 न्यूज अपडेट को बताया कि संविधान के भाग 9 ए , जो नगरपालिकाओं से संबंधित है. को अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों पर लागू करने से अनुच्छेद 243जेड सी के तहत स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है, जब तक कि संसद द्वारा इसे विस्तारित न किया जाए। राज्य विधानमंडल के पास अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिकाओं से संबंधित प्रावधानों को लागू करने या उन्हें विस्तारित करने का अधिकार नहीं है। पांचवीं अनुसूची के पैराग्राफ 5 (1) के तहत राज्यपाल को केवल सीमित शक्तियां दी गई हैं कि वे किसी अधिनियम को अनुसूचित क्षेत्रों में लागू करने या न करने का निर्देश दे सकते हैं। लेकिन, अनुच्छेद 243 जेड सी इन शक्तियों से ऊपर है। पेसा अधिनियम का उल्लंघन, जो अनुसूचित क्षेत्रों में स्वशासन की गारंटी देता है। पेसा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, अनुसूचित क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले किसी भी निर्णय से पहले ग्राम सभा से परामर्श करना अनिवार्य है। अधिसूचना 26.12.2024 ग्राम सभाओं से परामर्श किए बिना जारी की गई, जो इस कानूनी प्रावधान का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता, अभिषेक पारीक ने 24 न्यूज अपडेट को बताया कि मुख्य विवाद 26.12.2024 की अधिसूचना से संबंधित है, जिसमें गिरवा ब्लॉक के कई गांवों, जैसे बलीचा, भोयोन की पंचायतली, डाकन कोटरा, देबारी, कालड़वास, कानपुर, सावीना खेरा (ग्रामीण), सीसाराम और तीतरड़ी, को राजस्थान के उदयपुर नगर सीमां में विलय कर दिया गया। ये क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र (राजस्थान राज्य) आदेश, 2018 के तहत अनुसूचित क्षेत्र घोषित किए गए हैं. जो 19.05.2018 को अधिसूचित हुआ था।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता, अभिषेक पारीक ने 24 न्यूज अपडेट को बताया कि याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि यह अधिसूचना 11.04.2019 के स्वायत्त शासन विभाग, जयपुर के विभागीय आदेश के क्लॉज 11 का उल्लंघन करती है, जिसमें राजस्थान पंचायत राज अधिनियम के तहत सार्वजनिक राय लेना अनिवार्य किया गया था। सुनवाई के बाद, न्यायालय ने अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वारा दिए गए आश्वासन के आधार पर निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक गिरवा ब्लॉक की ग्राम पंचायतों के संबंध में राज्य सरकार द्वारा कोई प्रभारी आदेश जारी नहीं किया जाएगा। यह मामला अब 17 जनवरी 2025 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
इससे पहले वर्ष 1969 में हुआ था विस्तार
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता, अभिषेक पारीक ने 24 न्यूज अपडेट को बताया कि इससे पहले वर्ष 1969 में हुआ था विस्तार। तत्कालीन नगर परिषद का सीमा विस्तार किया गया था। बड़गांव, बड़ी, बेदला, भुवाणा, सापेटिया, शोभागपुरा सीसारमा, बलीचा, डाकन कोटड़ा, सवीना, देवाली, तीतरड़ी, देबारी, भोइयों की पचौली, बेड़वास, कलड़वास, कानपुर, राजस्व ग्राम आयड़ और देवाली (फतहपुरा) को निगम में जोड़ा गया है। इन क्षेत्रों में करीब 1 लाख 5 हजार 564 की आबादी है। निगम में जुड़ने के बाद इन्हें नियमित सफाई, सड़क-नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट, पानी और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण जैसी सुविधाएं मिलेंगी। अभी तक यहां ये काम यूडीए और पंचायतों के जरिए किए जा रहे थे। लेकिन मॉनिटरिंग के अभाव में लोग सुविधाओं से वंचित थे। 24 न्यूज अपडेट को मिली जानकारी के अनुसार निगम ने साल 2018 में प्रदेश सरकार को सीमांकन का प्रस्ताव भेजा था। गत जुलाई में इसको हरी झंडी मिली थी। इसके बाद गत 27 दिसंबर को कलेक्टर ने निगम में जोड़े जाने वाले क्षेत्रों का ब्यौरा भेजा। पहले 30 वार्ड बढ़ाने की तैयारी थी, लेकिन जनसंख्या के आधार 10 वार्ड बढ़ाने की ही मंजूरी मिली थी।
बिग ब्रेकिंग……गिर्वा टीएसपी के गांवों को नगर निगम सीमा में शामिल करने पर हाईकोर्ट की रोक, सुनवाई के दौरान आज….

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