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फर्जी लाइसेंस बनाने के आरोप में डीटीओ शर्मा एपीओ

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24 न्यूज अपडेट राजसमंद. प्रदेश के अन्य जिलों के लोगों का फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के मामले में जिला परिवहन अधिकारी डॉ. कल्पना शर्मा को परिवहन मंत्रालय ने एपीओ करते हुए पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा है। एपीओ अवधि के दौरान मुख्यालय जयपुर रहेगा। गौरतलब है कि डीटीओ डॉ. शर्मा पर अन्य राज्यों और जिलों के हैवी लाइसेंस का रिन्युअल करना, नया बनाना, चोरी के वाहनों का पुनः पंजीयन करने सहित असाइनमेंट करना, वाहनों के टैक्स में छूट देने का आरोप लगाए गए। इस पर अतिरिक्त प्रादेशिक परिवहन अधिकारी उदयपुर मनीरू शर्मा को विभाग ने जांच सौंपी, लेकिन जांच में सभी आरोप निराधार एवं मिथ्या बताते हुए शिकायत को निरस्त कर दिया। इस पर शिकायतकर्ता ने वापस जयपुर परिवहन मंत्रालय में शिकायत की, जिस पर उक्त आदेश जारी किया।

शिकायत में समाज विशेष के बाहरी राज्यों के लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप
मार्च 2024 में डीटीओ डॉ. कल्पना शर्मा के खिलाफ शिकायत की गई। इसमें आरोप है कि समाज विशेष के बाहरी र राज्यों के लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी आईडी, दस्तावेजों से लाइसेंस में पता परिवर्तन करते हुए 25 से 30 हजार रुपए में रिन्युअल के साथ नए लाइसेंस बनाए गए। इसकी साइबर एक्सपर्ट की मदद से जांच करने की मांग की गई थी। शिकायत में आरोप लगाए गए कि गलत ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए कनिष्ठ लिपिक बनवीर की आईडी का इस्तेमाल किया गया। माइकल उर्फ विष्णु कलाल जो कि कार्यालय का कार्मिक नहीं होने के बाद भी सारा दिन कार्यालय में ही बैठा रहता है। लाइसेंस को 20 से 30 हजार रुपए लेकर डॉ. कल्पना शर्मा अनुवल करती है। अन्य राज्यों के इस्माइल, तोफीक, जुबेर खान, बिलादीन, अहमद, गुलशन, दीन मोहम्मद, मुसर्रफ, रफीक, आसिफ, मोहम्मद यूसुफ, मोईन, आमेरसिंह, मोहम्मद खलीफ के लाइसेंस एक ही पते पर जारी हुए हैं। जबकि आवेदन में मेवात, गुडगांव, हरियाणा, गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश, बरार भीम, राजसमंद में सभी एक ही शपथ पत्र से एक ही निवास स्थान पर रहना बता रखा है, जो पूर्णतया फर्जी हैं। वकील के हस्ताक्षर एवं सील भी फर्जी हैं। शपथ पत्र की

दिनांक व नोटेरी दिनांक में 20 दिन का अंतर है। शपथ पत्र बाद में लिया और नोटेरी पहले कर दी है। आधार कार्ड नंबर में भी एड्रेस एवं फोटो चेंज किए हैं। पूरे प्रकरण में डीटीओ डॉ. कल्पना शर्मा, बलवीर और माइकल के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। आरोप लगाया कि श्री देव ई-मित्र संचालक मुकेश निवासी केलवा, गोमती चौराहा ने फर्जी आईडी बनाने में सहयोग किया।

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