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फर्जी महिला सब इंस्पेक्टर मोना के घर मिला कैश और सोना, दो साल तक लेती रही थी फर्जी तरीके से पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग और पता चलते ही हो गई चंपत

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24 न्यूज अपडेट.जयपुर। राजस्थान पुलिस अकादमी में फर्जी सब इंस्पेक्टर बनकर ट्रेनिंग करने वाली मूली उर्फ मोना की कहानी चौंकाने वाली है। तेज दिमाग पुलिस को मोना ने चक्करघिन्नी बना दिया। ऐसे चक्कर चलाए कि पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में भी पकड़ में नहीं आई, राज खुलने के बाद चंपत हो गई और पुलिस हाथ मलती रह गई। अब पुलिस धीमी गति से कार्रवाई कर रही है क्योंकि सबसे बड़ा सवाल तो खुद पुलिस पर उठता है कि ऐसी फ्रॉड आखिर पुलिस अकादमी में क्यों नहीं पकड़ी गई। इसके लिए जो लोग जिम्मेदार हैं उन पर क्या कार्रवाई होगी। इधर, इस मामले में मूली उर्फ मोना के घर पर शास्त्री नगर थाना पुलिस ने सर्च किया। इस दौरान मोना के घर से पुलिस की कई वर्दियां, इंटरनल एग्जाम के पेपर और 7 लाख रुपए, सोना समेत अन्य सामान मिला है। मूली नागौर जिले के निम्बा के बास की रहने वाली है व नाम मोना बुगालिया उर्फ मूली बताती है। उसने फर्जी सब इंस्पेक्टर बनकर ट्रेनिंग ले ली। कोर्ट की ओर से सर्च वारंट लेने के बाद शास्त्री नगर के मेजर शौतान सिंह कॉलोनी स्थित मोना के किराए के कमरे पर सर्च किया गया। कमरे में 7 लाख रुपए कैश, तीन वर्दी, आरपीए के इंटरनल एग्जाम के पेपर और अन्य डॉक्यूमेंट मिले। पुलिस टीम ने सर्च में मिली सभी चीजों को जब्त कर किया है। 29 सितंबर 2023 को आरपीए के आरआई रमेश चंद ने मूली उर्फ मोना के खिलाफ शास्त्री नगर थाने में मुकदमा दर्ज करवाया था। वह फर्जीवाड़े में आरपीए में ट्रेनिंग ले चुकी थी। आरपीए कैंपस में ही वर्दी में रहती थी। ट्रेनिंग करने वाले थानेदारों को पिछले बैच की अभ्यर्थी बताती और पिछले बैच वालों को नए बैच की बताती। उसने सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रही थी, लेकिन सलेक्शन नहीं हुआ। पिता ट्रक ड्राइवर हैं। तीन साल पहले मोना ने सोशल मीडिया पर खुद के सब-इंस्पेक्टर में चयनित होने की खबर फैलाई थी। रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने सिलेक्शन पर बधाई दी थी। मोना हर किसी को अपने संघर्ष की कहानी बताने लगी कि कैसे परिवार की आर्थिक हालात कमजोर होने के बावजूद उसने संघर्ष से मुकाम हासिल किया था।
खुद को आईबी की सब-इंस्पेक्टर भी बताती थी
मोना बुगालिया ने यह पता लाग लिया िा कि आरपीए में कई बैच के सब-इंस्पेक्टर ट्रेनिंग कर रहे हैं। वो इस कंन्फयूजन का फायदा उठाने लग गई। आरपीए में आईबी के कैंडिडेट्स ट्रेनिंग करने आते हैं। जो पूछता कि कौनसे बेच से हो, वो उसके बेच को छोड़ कर दूसरा बैच बता देती। कई बार खुद को आईबी की कैंडिडेट बताया। मोना कभी इंडोर क्लास और एक्टिविटीज अटेंड नहीं करती थी। क्योंकि उसे पता था कि अगर वो क्लास में जाएगी, तो हाजिरी होगी। जो भी ट्रेनिंग के लिए एकेडमी में आते हैं, उन्हें वहीं हॉस्टल में रहना होता है, लेकिन मोना का नाम चुने गए कैंडिडेट्स में नहीं था, वो हॉस्टल में नहीं रहती थी। हर दिन ट्रेनिंग के बाद वह बाहर चली जाती। आने-जाने के लिए भी मेन गेट का इस्तेमाल नहीं करती थी। क्योंकि वहां आईकार्ड चेक होता था। बल्कि वह उस गेट से आती-जाती थी जिससे पुलिस अफसरों के परिवार आते-जाते थे। ट्रेनिंग एकेडमी में वह कैंटीन, स्वीमिंग पूल, फैमिली क्वार्टर्स में खूब समय गुजारती थी। कैंटीन वह वर्दी पहन कर जाती और नए-नए सब इंस्पेक्टर्स से दोस्ती करती। पूरे दो साल तक मोना ने हर जगह वर्दी का पूरा फायदा उठाया। वो कभी सोशल मीडिया पर वर्दी में अपनी तस्वीरें पोस्ट करती थी। कई मौकों पर प्रोग्राम में चीफ गेस्ट बन जाती थी। लोगों को अपनी झूठी कामयाबी की कहानी सुनाती थी। पुलिस अफसरों से जान-पहचान बना कर अपना काम निकलवाती थी।
ऐसे खुल गई पोल
11 से 23 सितंबर तक सैंडविच ट्रेनिंग होनी थी। मोना सैंडविच ट्रेनिंग अटेंड करने आई थी। एकेडमी में ट्रेनिंग कर रहे सब इंस्पेक्टर्स ने अपना एक व्हाट्स एप ग्रुप बना रखा था। जहां मोना की एक सब इंस्पेक्टर से बहस हो गई और मोना ने तब उसे एकेडमी से निकलवा देने की धमकी दे डाली। बस यहीं से उसकी पोल खुलनी शुरू हो गई। जिसे मोना ने धमकी दी थी। उसी ट्रेनी एसआई ने उसके बारे में पता लगाना शुरू कर दिया। लेकिन उसे हैरत हुई कि मोना का नाम तो किसी लिस्ट में नहीं है। इसके बाद शख्स ने अधिकारियों से मोना की शिकायत की। तब जाकर अधिकारियों के सामने मोना का पोल खुला, इसके बाद फौरन उन्होंने मोना के खिलाफ शास्त्रीनगर थाने में रिपोर्ट लिखवा दी। लेकिन मोना फरार हो गई।

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