महाराणा उदयसिंह की प्रतिमा पर पंचगव्य स्नान, पूजा-अर्चना एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन उदयपुर शहर को ओर अधिक सुन्दर एवं समृद्ध बनाने की जरूरत – पारस सिंघवी 24 न्यूज अपडेट उदयपुर। उदयपुर शहर के 472वें स्थापना दिवस पर आयोजित दो दिवसीय समारोह के दूसरे दिन शुक्रवार को लोकजन सेवा संस्थान एवं जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उदियापोल स्थित महाराणा उदयसिंह की प्रतिमा पर पंचगव्य स्नान, पूजा अर्चना एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। प्रो. विमल शर्मा ने बताया कि आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. के. के. दवे, विशिष्ठ अतिथि प्रो. उमा शंकर शर्मा , उपमहापौर पारस सिंघवी, प्रो. मिश्री लाल मांडोत थे, अध्यक्षता कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने की। प्रतिमा के मंत्रोचार से पं. गणेश लाल नागदा व इन्द्र सिंह राणावत ने पंचगव्य अभिषेक कर चंदन तिलक , पुष्प माला उपरणा व पाग धराई। सभी सदस्यों ने महाराणा उदयसिंह की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। मूर्ती स्थल पर आयोजित समारोह में संस्थान के पूर्व अध्यक्ष डा. जय राज आचार्य ने अतिथियों का स्वागत करते हुए दो दिवसीय समारोह की जानकारी एवं प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। संस्थापक महासचिव जय किशन चैबे ने उदयपुर स्थापना समारोह मनाये जाने की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। प्रो. के. क.े दवे ने कहा कि पैसिफिक विश्विद्यालय लोकजन सेवा संस्थान के द्वारा उदयपुर हितार्थ किये जाने वाले हर कार्य मे सहभागिता निभाने के लिये क्रृतसंकल्प रहेगा। उपमहापौर पारस सिंघवी ने कहा कि उदयपुर शहर विश्व में पर्यटन की दृष्टि से विख्यात है इसे ओर अधिक सुंदर एवं समृद्ध बनाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। सिंघवी ने उदयसिंह जी की मूर्ति पर माल्यार्पण हेतु स्टील की सीढ़ी लगाने की व्यवस्था करा देने की घोषणा की। अध्यक्षता करते हुए प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि आज का दिवस पन्नाधाय, महाराणा उदयसिंह के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का दिवस है जिन्होंने अपनी विरासत में हमें सुंदर शहर को दिया। आज हम वाटर हार्वेस्टिंग की बात करते है, महाराणा ने उस समय इसकी कल्पना की थी और आज हमारा शहर पूरे विश्व में झीलों की नगरी के नाम से जाना जाता है। इसका संरक्षण एवं भावी पीढ़ी के लिए संजोये रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।प्रो. विमल शर्मा ने कहा कि मंच तीन कुलपतियों, उपमाहापौर व अधिष्ठाता की उपस्थिति से गौरवान्वित हुआ है। स्थापना दिवस पर संस्थान के कार्यकर्ता एवं उपस्थित आमजन ने अपने अपने घरों में 11 दीपक जला उत्सव को मनाया। प्रो उमाशंकर शर्मा ने कहा कि अक्षय तृतीया पर कई सुखद संयोगों के साथ हमारे शहर की स्थापना हुई है व हमारा शहर विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाये हुए है। डा. राजेन्द्र नाथ पुरोहित ने बताया कि पूर्व मे उदियापोल का नाम कमलिया पोल हुआ करता था व उस सुरक्षा के लिये सदैव बंद ही रखा जाता था। 9 फरवरी 1883 को महाराणा सज्जन सिंह के पुत्र रत्न प्राप्ती पर यह आम जनता के आवागमन हेतु उत्साह पूर्वक खोला गया और उदियापोल नामकरण किया गया। हालांकि अगले ही दिन नवजात कुंवर तो ब्रह्मलीन हो गये किंतु द्वार से आवागमन निर्बाध चलता रहा। समारोह मे श्री रत्न मोहता ने पन्नाधाय पर कविता सुनाई। कृष्णकांत कुमावत ने बताया कि समारोह में डा. रमाकांत शर्मा, प्रकाश अग्रवाल , इन्द्र सिंह राणावत, सुरेश तंबोली, हाजी सरदार महोम्मद, रामचंद्र वारी, डा. सुरेन्द्र पालीवाल, डॉ. मनीष श्रीमाली, पं. गणेश लाल नागदा, मनोहर लाल मूंदड़ा, डा. ममता पानेरी, मनोहर लाल पुरोहित , दिलीप रावत सहित शहर के गणमान्य नागरिकों ने महाराणा उदय सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धाभाव से नमन किया। संचालन जयकिशन चैबे ने किया जबकि आभार गणेश लाल नागदा ने जताया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation उदयपुर के अनुराग बाबेल का आईएफएस में चयन Next Post