स्टेट डेस्क। धार्मिक चश्मों को हटाकर हकीकत से आज ही रूबरू हो जाइये नहीं तो अगली दीपावली आपके किसी अपनों की ऐसी ही होने वाली है। पटाखे चलाने के उन्माद में इस बार भी जाने-अनजाने में जयपुर में पांच बच्चों की आंखों रोशनी चली गई। इन बच्चों के बारे में डाक्टरों का कहना है कि आंखों की रोशनी आने की संभावना बहुत कम बची है। पटाखों का ऐसा जश्न आखिर किस काम का जो किसी की आंखों को सदा के लिए छीन ले। ऐसा हर साल होता आ रहा है व हमने इसे नहीं रोका तो होता रहेगा। क्या इसके लिए उन लोगों को दोष दें जो बार-बार कहते हैं कि पटाखे चलाना हमारे धर्म के जश्न से जुड़ा हुआ है। ऐसे में जमकर चलाइये, पर्यावरण प्रदूषण की चिंता मत कीजिए। या फिर खुद को कुसूरवार मानें जो जोश में होंश गंवा बैठे। दोषी सरकारी तंत्र को मानें जिसने पटाखों की बिक्री के तो इंतजाम कर दिए लेकिन अतीत की ऐसी भयानक घटनाओं वाले पोस्टर नहीं लगाए जो चेतावनी का काम करते, जो पटाखे चलाने से पहले सभी तरह के सुरक्षा उपाय करने को सोचने पर मजबूर कर देते। पटाखे चलाते समय पानी की बाल्टी, रेत सहित आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा, सूती वस्त्र आदि पहने आपने किसको देखा होगा। कुछ को जरूर देखा होगा जो जागरूक हैं, बाकी दुनिया फोटो व रील के चक्कर में दुबली हुई जा रही है। हादसों की परवाह ना जागरूकता का कोई भान। बताया गया कि घायल हुए 80 से ज्यादा लोग एसएमएस हॉस्पिटल की इमरजेंसी में पहुंचे। जयपुर, झुंझुनूं, धौलपुर, नागौर, अलवर और टोंक के 5 बच्चे और एक युवती आंखों में बारूद जाने और पटाखों की चिंगारी लगने से घायल हो गए। आंख की रोशनी भी चली गई। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चोंं का ऑपरेशन कर दिया है, लेकिन रोशनी वापस आने की संभावना 10 फीसदी से भी कम है।एसएमएस हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी ने मीडिया को बताया कि दीपावली के दिन से लेकर आज सुबह तक करीब 80 से ज्यादा मरीज इमरजेंसी में आ चुके हैं। 9-10 मरीज की स्थिति गंभीर थी। भर्ती करके इलाज करना पड़ा। ज्यादातर मामले आंखों के खराब होने से संबंधित हैं। इनकी आज और कल सर्जरी की गई। एसएमएसस में ऑप्थेल्मोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी और सीनियर प्रोफेसर डॉ. पंकज शर्मा ने बताया कि 8 मरीज ऐसे थे, जिनकी आंखें पटाखे चलाने से प्रभावित हुई। इनमें से 3 के ऑपरेशन कल किए गए, 5 के ऑपरेशन आज किए गए। आज हमारी टीम ने पूरे दिन ऑटी चालू रखकर सभी मरीजों के ऑपरेशन कंप्लीट किए हैं। घायल मरीजों में सभी बच्चे हैं। 6 बच्चों के विजन खत्म होने की स्थिति में है। झुंझुनूं में बुहाना के पास एक गांव के रहने वाला 8 साल के यश की आंख में गहरी चोट आई है। यश की मां ने बताया- उसके साथ एक दूसरा लडक़ा खड़ा था। जो पटाखे वाली बंदूक चला रहा था। बंदूक चलाने के दौरान ही यश उसके सामने आ गया। चिंगारी से यश की बांयी आंख में गहरी चोट आई है। अलवर के रहने वाले 7 साल के करण सिंह की दांयी आंख, नागौर के राजकुमार (10) की बांयी आंख, निवाई के अभिषेक (12) की बांयी आंख और जयपुर के चारदीवारी एरिया की रहने वाली हरिष्का (11) की दांयी आंख पटाखे जलाने के दौरान खराब हो गई, जिनकी सर्जरी की गई है।
पटाखों ने छीन ली 5 बच्चों की रोशनी, हर साल हादसे होते हैं, नहीं लेते सीख

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