24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। धर्मांतरण व आदिवासियों के मुद्दे पर अपने मुखर व बेबाक बयानों के लिए जाने जाने वाले और हाल ही में सलूंबर में भाजपा की चुनावी जीत पर खुशी जताते हुए ‘मुगेम्बो खुश हुआ’ कह कर सुख्रियों में आए उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने लोकसभा मेंएक अतारांकित प्रश्न उठाया है। उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने ओर से भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग से मंत्रजी के माध्यम से कॉन्वेंट स्कूलों का लेखा परीक्षण और वित्तीय प्रबंधन सवाल पूछा गया। लोक सभा में यह अतारांकित प्रश्न संख्या 220 था। इस प्रश्न में कान्वेंट स्कूलों की राज्यवार संख्या, राजस्थान में जिलेवार संख्या और उनके ऑडिट वित्त पोषण आदि के बारे में पूछा गया। जवाब में बताया गया कि राजस्थान में 176 ईसाई मिशनरी स्कूल हैं जिनमें से उदयपुर में 18 स्कूल हैं जो राजस्थान में नंबर के हिसाब से तीसरे स्थान पर आता है। पहले स्थान पर अजमेर है जहां पर 28 स्कूल हैं। दूसरे स्थान पर जयपुर है जहां पर 26 ईसाई मिशनरीज के स्कूल हैं।अब सवाल यह उठता है कि सांसद ने यह सवाल आखिर क्यों व किस प्रयोजन में उपयोगिता के लिए पूछा। जबकि ये सभी आंकड़े अगर वे चाहते तो राज्य सरकार या केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय से मांग लेते, आसानी से उपलब्ध हो जाते। लेकिन संसद के पटल पर इन्हें दर्ज कराने के पीछे मंशा लगता है कि अपने लिए बड़ा राजनीतिक केनवास तैयार करने की है। आपको बता दें कि दक्षिणी राजस्थान में धर्मांतरण का मुद्दा बरसों से अहम रहा है। सलूंबर विधानसभा सहित हाल के सभी चुनावों में आदिवासी इलाकों में कन्वर्जन, लव जिहाद जैसे शब्दों के साहारे सांसद रावत ने मुखर होकर बयान दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषक बता रहे हैं कि इससे पहले भाजपा के नेता इन मुद्दों पर इतने एग्रेसिव नहीं थे व उनके बयानों में भी ऐसा तीखापन नहीं था जैसा कि रावत के बयानों में है। ऐसा लग रहा है कि रावत आते ही हार्डकोर हिन्दुत्व की छवि के साथ ही आदिवासी हितों की सशक्त पैरवी करने वाले नेता के रूप में स्थापित होना चाहते हैं ताकि उनका कद केंद्र की राजनीतिक तक बढ़ सके। शॉर्ट टर्म गेन और लांग टर्म पॉलिटिकल गेन की यह तकनीक भाजपा में आजमायी हुई भी है। कई नेता केवल तीखे बयानों के सहारे ही केंद्र में वह जगह पा गए हैं जो बरसों से जाजमवीर बने नेताओं को नसीब नहीं हुई है।डॉ. मन्ना लाल रावत ने लोकसभा में पूछा कि क्या शिक्षा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे किः(क) देश के विभिन्न राज्यों में संचालित कॉन्वेंट स्कूलों की अवधारणा और राज्य-वार संख्या कितनी है।(ख) राजस्थान में जिला-वार कॉन्वेंट स्कूलों की अवधारणा और संख्या कितनी है।(ग) क्या कॉन्वेंट स्कूलों की गतिविधियों की लेखा परीक्षा और वित्तीय प्रबंधन सरकार द्वारा किया जाता है, और(घ) यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है? यह आया जवाब – शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री जयंत चौधरी)(क) से (घ)- शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है। केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले/वित्तपोषित स्कूलों के अलावा अन्य स्कूल संबंधित राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इस मंत्रालय में कॉन्वेंट स्कूलों के बारे में विशिष्ट जानकारी/डेटा नहीं रखा जाता है। हालांकि, राजस्थान के लिए राज्यवार और जिलेवार ईसाई अल्पसंख्यक समूह द्वारा संचालित स्कूलों की संख्या के आंकड़े अनुलग्नक में दिए गए हैं। निजी स्कूलों के वित्तीय प्रबंधन, लेखा परीक्षा आदि से संबंधित मामले और संबंधित मुद्दों को संबंधित राज्य सरकार के नियमों और निर्देशों के अनुसार विनियमित किया जाता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation पूर्बिया समाज का सामूहिक विवाह 30 अप्रैल 2025 को बैठक में लिए समाज विकास के कई महत्वपूर्ण निर्णय कार्यवाहक नर्सिंग अधीक्षक अमीन खान, गणेश लाल डांगी व जितेंद्र भटनागर का सम्मान