24 न्यूज़ अपडेट उदयपुर. 24 अगस्त 2024 चंद्रयान 3 की सफलता के उपलक्ष में घोषित “राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस” पर डा. दौलत सिंह कोठारी संस्थान द्वारा आयोजित वेबीनार में प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉक्टर नरेंद्र भंडारी (जिन्हें चंद्रयान मिशन का जनक भी कहा जाता है) ने बताया कि उदयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में भूतपूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सुझाव दिया था कि हमें कुछ निशान चंद्रमा पर भी छोड़ने चाहिए । इसका अनुसरण करते हुए ही चंद्रयान एक मिशन प्रारंभ हुआ । उन्होंने आगे कहा कि चंद्रमा के ध्रुवों पर बर्फ के रूप में पानी के उपलब्धता है , यह भारत की ओर से विश्व को सबसे बड़ी देन है ।
अंतरिक्ष विभाग के पूर्व वैज्ञानिक हरिओम वत्स ने बताया कि चंद्रयान 3 की सफलता के बाद विश्व में भारतीय वैज्ञानिकों का सम्मान बहुत बड़ा है । डा. एस एस पोखरणा ने बताया कि वेबीनार में स्पूतनिक से लगाकर चंद्रयान-3 तक की विकास यात्रा , विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के उद्गम का इतिहास तथा भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी मिशन पर विस्तृत चर्चा करने के लिए भारत के विभिन्न शहरों से इसरो व अन्य संस्थानों के 25 वैज्ञानिकों ने भाग लिया । यह जानकारी विज्ञान समिति के मीडिया प्रभारी प्रोफेसर विमल शर्मा ने दी।
चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारतीय वैज्ञानिकों का विश्व में सम्मान बहुत बड़ा है: हरिओम वत्सचंद्रमा के ध्रुव पर बर्फ के रूप में पानी की उपलब्धता : भारत की विश्व को सबसे बड़ी देन : डॉ नरेंद्र भंडारीराष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर वैबीनार का आयोजन

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