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गुरु वो ही सर्वश्रेष्ठ जो स्वयं अच्छा आचरण करें, फिर दूसरों को उपदेश दे: श्री दिव्येशकुमार महाराज

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-श्री विशानागर वणिक (पारख) समाज की ओर से श्री गिरिराज धार्याष्टकम् गुणगान महोत्सव में वैष्णवजनों का अपार उत्साह
उदयपुर। वैष्णवाचार्य श्री दिव्येशकुमार महाराज ( इंदौर- नाथद्वारा) ने कहा कि गुरु वो ही सर्वश्रेष्ठ होता है जो स्वयं अच्छा आचरण करें और फिर दूसरों को उपदेश दें। उन्होंने कहा कि प्रभु की लीला में रहस्य है। उसको अच्छे आचरण और अध्ययन से ही समझा जा सकता है। आज के युग में व्यक्ति को जीवन जीना सीखना आना चाहिए, क्यांेकि बहुत से लोग यह कहकर खुश हो जाते हैं कि बस जीवन की गाडी कट रही है।
श्री विशानागर वणिक (पारख) समाज की ओर से श्री गिरिराज धार्याष्टकम् गुणगान महोत्सव के दूसरे वैष्णवाचार्य श्री दिव्येशकुमार महाराज ने वैष्णवजनों को दिए अपने प्रवचन में प्रभु की लीलाओं और उनके रहस्यों के बारे में बताया। महाराजश्री ने कहा कि गुरु वो ही होता है जो सर्वप्रथम आचनोति, आचार्यवृति और इति आचार्य की सुंदर परंपरा के अनुसार अध्ययन करता है और इसके बाद वह अपने जीवन में उतारकर दूसरों को उपदेश देता है। हम पालन नहीं कर रहे और दूसरों को उपदेश दे तो वह ज्ञान कभी सार्थक हो ही नहीं सकता। महाराजश्री कहा कि जब भगवद  सेवा करते हैं तो पूरा भाव और चित्त प्रभु में ही लगे तभी सेवा सार्थक हो सकती है। हम वर्तमान में मंदिरों को ही चर्चा का स्थल बना देते हैं, जबकि मंदिर के कोने-कोने में प्रभु का वास होता है। महाराजश्री ने प्रभु के आशीर्वाद को समझाते हुए कहा कि स्वर्ग और नरक यहीं पर है। अगर हम आराम से बैठकर परिवार के साथ बात कर रहे हैं, भोजन कर रहे हैं और सुख दुख को बांट रहे हैं तो यहीं पर स्वर्ग है, वरना नरक ही भोग रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें जीवन जीना सीखना चाहिए, आर्ट ऑफ लीविंग यही है कि कोई हमें पूछे कैसे है तो हम कहें कि बहुत आराम से हैं, घर में हमारे प्रभु विराजे हुए हैं। कई लोग इसका जवाब यह देते हैं कि बस कट रही है तो उनका जीवन कैसे सफल होगा। उठना-सोना सब धर्म सीखाता है। महाराजश्री ने आज की युवा पीढि को संदेश दिया कि मोबाइल में अलार्म लगाकर बार-बार स्नूज का बटन दबाने से सफलता नहीं मिलती।
महाराजश्री ने दूसरे दिन प्रभु की कई तरह की लीलाओं को वैष्णवजनों को समझाया।
कार्यक्रम में इंदौर से आये राजेश भाई एवं वर्षा नागर ने आप श्री द्वारा संचालित दिव्य पुष्टि विद्यापीठ के बारे में जानकारी दी। रविवार को समाज के नवनीतलालजी, गोपालदास, सुनील पारीख, अनिल पारीख, अशोक पारीख, नवनीतदास पारीख, राजेंद्र, दिलीप कृष्णदास पारीख व कृष्णचंद्र पारीख ने महाराज श्री का स्वागत किया। महिलाओं द्वारा लालन, माताश्री व बहुजी का स्वागत किया गया। महिलाओं द्वारा सुंदर रंगोली बनाई गई।

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