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गंदा है पर धंधा है : हम देशभक्ति में डूबे हैं उधर रिलायंस ने “ऑपरेशन सिंदूर“ ट्रेडमार्क के लिए आवेदन कर दिया, फिल्म बन सकती है

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24 न्यूज अपडेट, नई दिल्ली। देश में एक ओर जहां ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर देशभक्ति और शौर्य की भावना उमड़ रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ कंपनियों ने इस नाम का कॉपीराइट हासिल करने के लिए इसे अपना ट्रेडमार्क बनाने की होड़ मचाई हुई है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह नाम, जो भारतीय सेना की वीरता और बलिदान का प्रतीक बन चुका है, को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया जाना चाहिए? कुछ का कहना है, “देशभक्ति में भी गंदा है, पर धंधा है।”
यह खबर आते ही कई लोगों ने कंपनियों पर गुस्से और नाराजगी का इज़हार किया है। उनका कहना है कि जब हम इस शौर्यगाथा को मन से महसूस कर रहे हैं और उसे जी रहे हैं, तो कुछ कंपनियां इसे अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही हैं। यह चिंता भी जताई जा रही है कि आने वाले समय में हम यह नाम ही नहीं ले पाएंगे, क्योंकि यह कॉपीराइट की भेंट चढ़ जाएगा।
रिलायंस का ट्रेडमार्क आवेदन
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 7 मई को “ऑपरेशन सिंदूर” नाम के लिए ट्रेडमार्क आवेदन किया है। यह आवेदन क्लास 41 के तहत किया गया है, जिसका मतलब है कि यदि यह ट्रेडमार्क अप्रूव हो जाता है, तो रिलायंस को इस नाम का उपयोग केवल फिल्म प्रोडक्शन, डॉक्यूमेंट्री, इवेंट्स और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए करने का अधिकार मिलेगा।
स्ट्राइक की पृष्ठभूमि
यह ट्रेडमार्क आवेदन उसी दिन किया गया, जब भारत ने पाकिस्तान के 7 शहरों में 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया। इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर है। यह ऑपरेशन उन महिलाओं की स्मृति में था, जिनके पतियों को 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने धर्म पूछने के बाद हत्या कर दी थी।
ट्रेडमार्क के अन्य दावेदार
रिलायंस के अलावा, मुकेश चेतराम अग्रवाल, ग्रुप कैप्टन कमल सिंह ओबेर (रिटायर्ड) और आलोक कोठारी ने भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ट्रेडमार्क के लिए आवेदन किया है। इस पर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि रजिस्ट्री सबसे पहले दाखिल किए गए आवेदन या सबसे मजबूत दावे को प्राथमिकता देगी।
नैतिक और कानूनी सवाल
इस मामले ने नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या देशभक्ति और शौर्य की भावना से जुड़े नामों का व्यापारिक उपयोग करना उचित है? क्या ऐसा करने से भारतीय सेना की वीरता का अपमान नहीं होता? इन सवालों का जवाब आने वाले समय में ट्रेडमार्क रजिस्ट्री के फैसले से ही मिलेगा।

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