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खेती की तैयारी से भण्डारण तक के 90 प्रतिशत काम संपादित करती हैं नारी शक्ति : डॉ. व्यास

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24 न्यूज अपडेट.उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा लघु एवं सीमांत कृषक परिवारों में कृषि मशीनरी को बढ़ावा देने हेतु व कृषि में श्रम साध्य साधनों के उपयोग पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र चित्तौड़गढ़ पर किया गया। यह प्रशिक्षण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा प्रयोजित परियोजना के अन्तर्गत आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के आरम्भ में निदेशक प्रसार शिक्षा एवं प्रोजेक्ट इन्चार्ज डॉ. आर.ए. कौशिक ने कृषक महिलाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए किसानों को जरूरत है सघन एवं सुक्ष्म अवधी कृषि की। इसके लिए उन्नत बीज, खाद एवं समय पर कृषि कार्यो को सम्पन्न करने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रो का उपयोग करना आवश्यक हो गया है। इनके कृषि में उपयोग ये से मानव श्रम न्यूनतम हो जाता है। अनुसंधानों के आधार पर कहा जा सकता है कि कृषि यंत्रों के उपयोग से कृषि कार्यों में लगने वाले श्रम व समय को 20-30 प्रतिशत तक कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त उर्वरकों, बीजों व रसायनों पर होने वाले खर्च में भी तकरीबन 15-20 प्रतिशत की कमी आ जाती है। प्रशिक्षण की मुख्य वक्ता डॉ. हेमु राठौड़, वैज्ञानिक एक्रिप ने कृषक महिलाओं के श्रम व साध्य साधनों के उपयोग पर प्रकाश डाला साथ ही उन्नत दरांती, मक्का छीलक यंत्र, मूंगफली छीलकयंत्र, ट्रांस्प्लान्टर, वेजीटेबल पिकिंग बैग, सोलर हेट, अंगुली मे पहने जाने वाली सब्जी कटर आदि पर प्रशिक्षण दिया। साथ ही महिलाओं द्वारा उनके सुरक्षित उपयोग को भी सूनिश्चित किया गया। प्रशिक्षण में डॉ. लतिका व्यास, आचार्य ने कृषि में महिलाओं के योगदान पर चर्चा की और बताया कि कृषि में खेती की तैयारी से भण्डारण तक की 90 प्रतिशत क्रियाएं महिलाओं द्वारा सम्पादित की जाती है। इसी दिशा में कृषि को और भी समृद्ध बनाने के लिए कृषक महिलाओं के लिए प्रशिक्षण आयोजित किये जा रहे है।
डॉ. आर.एल. सोलंकि, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्तौड़गढ़ ने कृषक महिलाओं को भूमि एवं मृदा की उर्वरकता बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार के तरीको पर तकनीकी ज्ञान प्रदान किया। प्रशिक्षण के दौरान आदर्श शर्मा, प्रोग्राम ऑफिसर, डॉ. कुसुम शर्मा, डॉ. दीपा इन्दौरिया, अभिलाषा, मदन गिरी व राजेश विश्नोई आदि ने भी विचार व्यक्त किये।

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