24 न्यूज अपडेट. बांसवाड़ा। राजस्थान के बडी संख्या में मजदूर कुवैत के शहरों में सड़कों पर रात बिताने को मजबूर हैं। इस्तिकलाल इलाके में रहने वाले बांसवाड़ा के लोगों ने बताया कि अग्निकांड के बाद सरकार बहुत ज्यादा सख्त हो गई है और पुरानी व असुरक्षित इमारतें खाली करा रहे हैं। ऐसे में उनका सामान बाहर सड़क पर रख दिया गया है। जिन इमारतों में प्रवासी रह रहे हैं वहां की बिजली काट दी गई है। इसके बाद इमारतों को खाली करने को कहा गया है। यहां पर बडी संख्या में राजस्थानी किराए पर रह रहे थे। अब हालात यह हो गए हैं कि नए कमरे भी नहीं मिल रहे हैं। सामान सड़क पर ही पड़ा है और वे अब काम पर भी नहीं जा पा रहे हैं। फोटो या वीडिया सोशल मीडिया पर शेयर करने की मनाही है व यदि कर दिया तो उनके उपर गिरफ्तारी की तलावार लटक सकती है। कुवैत के शहर बेनिद अल गर के इस्तिकलाल इलाके में बांसवाड़ा-डूंगरपुर के मजदूर बड़ी संख्या में रहते हैं। आपको बता दें कि कुवैत के मंगाफ शहर में 12 जून को 6 मंजिला इमारत में आग लग गई थी। हादसे में 49 मजदूरों की मौत हो गई थी। इनमें 45 मजदूर भारतीय थे। हादसे के से कुवैत में जर्जर इमारतों को खाली कराने का अभियान चल रहा है।एक कमरे में बड़ी संख्या में रहने वाले मजदूरों को निकाला जा रहा है। एक वीडियो में कुवैत म्यूनिसिपैलिटी का कर्मचारी भारतीय श्रमिकों को बाहर निकालने का आदेश दे रहा है। 12 जून को मंगाफ में अग्निकांड के बाद जर्जर इमारतों से मजदूरों को निकाला जा रहा है। शहर में फ्लैट में रहने वाले लोग सुरक्षित हैं, लेकिन जर्जर पुरानी इमारतों में, छोटे गलियारों और कमरों में एक साथ 7-8 की संख्या में रहने वाले मजदूरों को निकाला जा रहा है। इनके लिए कोई भी अस्थायी प्रबंध नहीं किए गए हैं। सड़क किनारे सामान रखकर ये लोग फुटपाथ पर ही रातें बिता रहे हैं। अग्निकांड के बाद सरकार सख्त है। पुरानी और असुरक्षित इमारतें खाली कराई जा रही हैं। कुवैत में राजस्थान के वागड़ क्षेत्र (बांसवाड़ा-डूंगरपुर) के करीब 5 हजार मजदूर काम करते हैं। सड़कों पर कितने मजदूर रहने को मजबूर हैं, इसका आंकड़ा सामने नहीं आया है, इनकी संख्या बढती ही जा रही है। दूतावास भी खास मदद नहीं कर रहा हैं इस्तिकलाल इलाके से भारतीय दूतावास महज एक किलोमीटर दूर है। कुछ इमारतें तो भारतीय दूतावास से केवल 500 मीटर दूर ही हैं। फिर भी मजदूरों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। यहां भारतीय और अन्य एशियाई देशों के मजदूर रहते हैं। इलाके में किराए पर नए कमरे भी नहीं मिल रहे हैं। सामान सड़क पर पड़ा है। मजदूर गर्मी में भटक रहे हैं। मजदूरों की सैलरी इतनी नहीं है कि वो सिंगल रूम या फ्लैट अफोर्ड कर पाए।एक रूम का किराया 150 से 200 दिनार है। एक कमरे में 5 से 10 लोग रहते हैं। प्रति मजदूर 20 से 30 दिनार का खर्च आता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation बांसवाड़ा आनंदपुरी का 15 साल का बच्चा गोगुंदा डैम में डूबा सिक्किम की बाढ़ में फंसे बांसवाड़ा के टूरिस्ट आईटीबीपी के के कैम्प में सुरक्षित