24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। फतहसागर झील (मुम्बईयां बाजार के सामने) उदयपुर में सैलानियों को नावों (सौर ऊर्जा / बैटरी से संचालित) से नौकायन कराने के लिए यूडीए की ओर से निविदा मांगी गई है। इसमें अनुमानित वार्षिक आय 450.00 लाख बताई गई है। धरोहर राशि कुल 9 लाख रूपए मांगी गई है। यह निविदा तीन साल के लिए रहेगी। निविदा सूचना में बताया गया कि निविदा को स्वीकार करने एव बिना कारण बताये निरस्त करने के समस्त अधिकार सक्षम अधिकारी के पास सुरक्षित रहेगा। बिडिंग डाक्यूमेन्ट 4 जनवरी प्रातः 10 बजे से 28 जनवरी को शाम 6 बजे तक प्राप्त एवं जमा करा सकेंगे।इसमें बताया गया है कि निविदादाता नावें जिससे तात्पर्य शक्ति चालित मोटर बोट्स (सौर ऊर्जा/ बैटरी से संचालित) है, चलाने के स्थान, स्थिति, समय, सैलानियों के आवक-जावक तथा उदयपुर विकास प्राधिकरण, उदयपुर, जिला प्रशासन, प्रादेशिक परिवहन अधिकारियों एवं. झील विकास प्राधिकरण/ माननीय उच्च न्यायालय, राजस्थान द्वारा झील में नावे चलाने के सम्बन्ध में निर्धारित विभिन्न शर्तों/नियमों को अच्छी तरह से अध्ययन कर समझ लें। इन शर्तों में जहां कही “नावे“ शब्द प्रयुक्त हुआ है उससे तात्पर्य “शक्ति चालित मोटर बोट्स“ (सौर ऊर्जा /बैटरी से संचालित) से है तथा प्राधिकृत अधिकारी से तात्पर्य “सचिव, उदयपुर विकास प्राधिकरण, उदयपुर“ से है। उच्च न्यायालय राजस्थान एवं झील विकास प्राधिकरण के विभिन्न नवीनतम निर्णयां /निर्देशों की पालना सुनिश्चित करते हुए ही नावों का संचालन करना होगा।बताया गया है कि निविदा में राशि वार्षिक दर हेतु भरी जानी है। निविदादाता को चाहिए कि वह भली प्रकार अध्ययन कर स्वयं भी झील पर आने वाले सैलानियों के सम्बन्ध में सर्वेक्षण कर लें। निविदा की धरोहर राशि (अर्नेस्ट मनी) निविदा अपलोड के पूर्व ऑनलाईन पोर्टल पर जमा करानी होगी। असफल निविदादाताओं की धरोहर राशि लौटा दी जावेगी। सफल निविदादाता को निर्धारित प्रपत्र में एग्रीमेन्ट बॉण्ड भरना होगा एवं निविदित राशि के एक वर्ष की पूरी अवधि के अनुबन्ध मूल्य की 10 प्रतिशत प्रतिभूति राशि अनुबन्ध पूर्व न्यास में जमा करानी होगी। सफल निविदादाता की धरोहर राशि प्रतिभूति राशि में समायोजित कर ली जावेगी। संविदा अवधि में संतोषजनक रूप से पूर्ण होने पर प्रतिभूति राशि लौटा दी जावेगी। बोली राशि के अतिरिक्त उस पर देय जीएसटी केन्द्र/राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दर पर अतिरिक्त देय होगी। उक्त राशि बोली राशि के साथ अतिरिक्त जमा करानी होगी, जिसे इस कार्यालय द्वारा संबंधित फर्म के जीएसटी नम्बर का उल्लेख करते हुए राजकोष में जमा करवाया जायेगा। बोली राशि एवं जीएसटी राशि ही जमा कराने योग्य पूर्ण राशि होगी। प्रस्तुत दर के अतिरिक्त जल संसाधन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष झील संरक्षण एवं संवर्धन मद में जो शुल्क निर्धारित है/किया जायेगा वह शुल्क निविदादाता द्वारा देय होगा। नावे चलाने का ठेका 3 वर्ष के लिए होगा। जिसकी अवधि निविदा स्वीकृति सम्प्रेषण के 15 दिन पश्चात् से प्रारम्भ मानी जावेगी। निविदा की अवधि 3 वर्ष के पश्चात् आपसी वार्ता व समझौते के आधार पर अधिकतम 1 वर्ष के लिए बढ़ाई जा सकेगी। निविदा अवधि के दौरान निविदा राशि निम्नानुसार जमा कराई जाना आवश्यक होगा। निविदा राशि प्रतिवर्ष गत वर्ष की राशि में 10 प्रतिशत राशि जोड़कर निर्धारित होगी। (जैसे :- यदि राजस्व की राशि दस प्रतिशत वृद्धि करने से 163150/- रूपये होती है जो हजार रूपये के पूर्णांक में 164000/- रूपये होगी।)समय : नावे चलाने का समय 1 मार्च से 30 सितम्बर तक प्रातः 8.00 बजे से सायं 7.30 बजे तक 1 अक्टूबर से फरवरी के अन्तिम दिन तक प्रातः 8.30 बजे से सायं 6.00 बजे तक। टिकिट बुकिंग खिड़की को सायंकाल निर्धारित समय से 1 घण्टा पूर्व बन्द करना होगा तथा नावे बन्द करने से पूर्व प्रतिदिन यह चैक करना आवश्यक होगा कि कोई नाव झील के किसी अन्य क्षेत्र में नहीं रह गई हो। प्राधिकृत अधिकारी द्वारा विशेष परिस्थितियों में समयावधि बढ़ाई व घटाई जा सकेगी। विशेष परिस्थितियों में समय का निर्धारण प्राधिकरण द्वारा अधिकृत करने के अनुसार रहेगा।16- विशेष शर्ते :- उपरोक्त शर्त संख्या 15 में ली जाने वाली दरो में अनुबंध के द्वितीय एवं तृतीय वर्ष में क्रमशः प्रतिवर्ष पूर्व वर्ष की टिकिट दर पर 10 प्रतिशत की वृद्धि की जा सकेगी। जो दस रूपये के पूर्णांक में होगी। (जैसे :- यदि टिकिट की राशि 330/- रूपये हो तो दस प्रतिशत वृद्धि करने से 330 $ 33 = 363/- रूपये होती है जो दस रूपये के पूर्णांक में 370/- रूपये होगी।) उपरोक्त शर्त संख्या 15 में ली जाने वाली दरों पर 3 वर्ष से 8 वर्ष तक के बच्चे के लिए उपरोक्त वर्णित निर्धारित दरों की आधी दर ली जावेगी एवं 3 वर्ष व इससे कम उम्र के बच्चे को निःशुल्क नौकायन करवाया जायेगा। समस्त निर्धारित दरे विदेशी सैलानियों के नौका विहार हेतु दोगुनी दर ली जा सकेगी।दरों का बोर्ड सार्वजनिक रूप से बोट हाउस पर लगाकर रखना होगा।उक्त दरों/किराये पर ही सैलानियों को नौकायन कराना होगा। प्रत्येक सैलानी को निर्धारित प्रपत्र में टिकिट जारी किया जावेगा। स्वीकृत दर से अधिक किराया वसूल करने पर ठेका निरस्त कर कानूनी कार्यवाही की जा सकेगी तथा नवीन अनुबन्ध होने तक न्यास द्वारा नौका संचालन का कार्य कराया जावेगा तथा कम राजस्व की वसूली ठेकेदार से की जा सकेगी। किन्तु संवेदक द्वारा स्वीकृत दर से कम किराया (छूट) वसूल किया जा सकेगा। टिकिट वसूली हेतु यदि उदयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा ऑटोमेटिक मशीन उपलब्ध करायी जाती है तो उसको काम में लिया जाना अनिवार्य होगा। नौका संचालन स्थल पर यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए एक सुसज्जित समस्त आवश्यक उपकरणों सहित रेस्क्यू बोट आवश्यक रूप से संचालन के दौरान उपलब्ध रखनी होगी। उदयपुर विकास प्राधिकरण एवं जिला प्रशासन द्वारा आपात परिस्थितियों में यदि नाव की आवश्यकता हो तो वांछित नाव, मोटर बोट इत्यादि तुरन्त मय ऑपरेटर के निःशुल्क उपलब्ध करानी होगी। टिकिट दरः निर्धारित दरों के टिकिट छपवाकर प्रत्येक यात्री को देना होगा। टिकिट का प्रारूप उदयपुर विकास प्राधिकरण, उदयपुर से अनुमोदन कराया जाना होगा।टिकिट बुकिंग कार्यालयः सफल निविदादाता को टिकिट कार्यालय खुद को स्वयं के खर्चे पर स्थापित करना होगा। इन उद्देश्यों के अतिरिक्त अन्य किसी कार्य हेतु बुकिंग कार्यालय का उपयोग पूर्णतया वर्जित होगा। बुकिंग कार्यालय पर विद्युत एवं टेलिफोन व्यय को ठेकेदार द्वारा स्वयं वहन करना होगा।नावः नावें (मोटर बोट्स) पर लाईट की व्यवस्था, सुरक्षा उपकरण, लाइफ जैकेट (प्रत्येक सैलानी एवं कर्मचारी हेतु स्वच्छ एवं भारतीय मानक अनुसार निर्मित), रस्से आदि स्वयं को उपलब्ध करवाने होंगे। प्रत्येक नाव पर निर्धारित बैठक क्षमता लिखनी होगी। नावे केवल सौर ऊर्जा/बैटरी द्वारा संचालित नावें ही काम ली जावेगी। रख-रखाव, संचालन टिकिट छपवाने, टिकिट देने का हिसाब किताब रखने व कर्मचारी, चौकीदार आदि पर होने वाले सम्पूर्ण व्यय एवं नौका विहार के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर समस्त जिम्मेदारी निविदादाता को स्वयं वहन करनी होगा। नाव लाईसेन्सः निविदादाता, सैलानियों को सर्दी, गर्मी व वर्षा से बचाने के उद्देश्य से छत वाली नावें उपलब्ध करवाएगा। इनके रंग रोगन एवं रख-रखाव एवं सफाई की अच्छी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा जिससे की सैलानियों में विपरीत छवि नहीं बने। नावें प्रादेशिक परिवहन विभाग राजस्थान से बोटिंग रेगुलेशन एक्ट के अन्तर्गत राज्य से लाईसेन्स शुदा एवं फिटनेस जारी करायी गई होनी चाहिए। लाईसेन्स एवं फिटनेस की फोटो प्रतियों उदयपुर विकास प्राधिकरण, उदयपुर को प्रस्तुत करनी होगी व टिकिट बुकिंग कार्यालय में फ्रेम करवाकर लगानी होगी एवं संबंधित थानों में देनी होगी। इस अवधि में राजस्थान बोटिंग रेगुलेशन एक्ट के नियमों व लाईसेन्स में दी गई शर्तो का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। निविदादाता को सैलानियों की सुविधा एवं सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना होगा। इस कार्य के लिए राज्य सरकार/परिवहन विभाग व झील विकास प्राधिकरण हेतु शुल्क यदि कोई शुल्क देय होगा तो वह निविदादाता को स्वयं वहन करना होगा।नाव चालकः निविदादाता को नावे चलाने के लिए प्रशिक्षित नाव चालकों की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। नाव चालकों के नाम व पतों की सूची, उनके लाईसेन्स की प्रतियां विभाग को देनी होगी। इनका कार्य संतोषजनक नहीं पाये जाने पर विभाग के निर्देश पर निविदादाता द्वारा किसी भी चालक/चालकों को हटाकर अन्य व्यवस्था करनी होगी। संचालन दल में कम से कम एक या दो कर्मचारी नेवी ट्रेण्ड या कोस्ट गार्ड या प्रशिक्षित गोताखोर होना आवश्यक होगा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... 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