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उदयपुर के पत्रकार को कांग्रेसी प्रवक्ता कहने वाले अनुराग ठाकुर आखिर क्यों हुए मंत्रिमंडल से आउट

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24 न्यूज अपडेट, पॉलिटिकल डेस्क। उदयपुर में पिछले साल 15 सितम्बर को एक प्रेसवार्ता के दौरान मणिपुर में कानून व्यवस्था पर सवाल करने पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश वर्मा को कांग्रेस का प्रवक्ता कहने वाले केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर इस बार मंत्रिमंडल से आउट हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ठाकुर को भाजपा की इंटरनल रिपोर्ट के बाद मोदी मंत्रिमंडल से आउट किया गया है। कहा जा रहा है कि ठाकुर को खुद उन्हीं की पार्टी के प्रमुख जेपी नड्डा ने पटखनी दी है। जब हिमाचल से मंत्री का कोटा देने की बात आई तो इस बार उनकी इंटरनल रिपोर्ट आड़े आ गई जिसमें विधानसभा उपचुनाव में हार का ठीकरा ठाकुर पर ही फोड़ा गया था। इसके अलावा पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के खुद मंत्री बन जाने पर उनका पत्ता साफ हो गया। अनुराग ठाकुर वर्तमान में हमीरपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं। आपको बता दें कि उदयपुर में प्रेसवार्ता के दौरान जब अनुराग ठाकुर अपराधों में राजस्थान की सरकार को नंबर वन बताते हुए गहलोत सरकार पर प्रहार कर रहे थे तब उस वक्त दैनिक नवज्योति में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार राजेश वर्मा ने मणिपुर पर सवाल कर दिया। उन्होंने पूछा कि अभी तक वहां हिंसा कैसे जारी है। इस पर मंत्रीजी नाराज हो गए थे व पत्रकार को कांग्रेसी प्रवक्ता कह दिया था। इसके बाद भी वर्मा ने 500 रूपए में गैस सिलेण्डर पर सवाल पूछा तो मंत्रीजी असहज हो गए। बाद में जब 30 सालों से अधिक समय से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार राजेश वर्मा ने जब ठाकुर से पूछा कि आखिर उन्होंने किस आधार पर उन्हें कांग्रेस का प्रवक्ता कहा तो मंत्रीजी के पास इसका कोई जवाब नहीं था। इसके बाद जो पावर और प्रेशर पॉलिटिक्स की गई उसकी चर्चा आज तक उदयपुर ही नहीं पूरे देश के पत्रकारिता जगत में है। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में खेल, युवा मामलों और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय संभालने वाले हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर को इस बार भी उम्मीद थी कि बड़ा पद जरूर मिलेगा। लगातार पांचवीं बार चुनाव जीतने के बाद और चुनाव प्रचार में गृहमंत्री के आश्वासन के बावजूद उन्हें कल दर्शक दीर्घा में ही बैठ कर संतुष्ट होना पड़ा। यह सब अनुराग ठाकुर व उनके पॉलिटिकल परिवार के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। यह बात अलग है कि वर्ष 2010 में जेपी नड्डा को प्रेमकुमार धूमल से मतभेदों के चलते हिमाचल में सरकार में वन मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब चक्का घूम गया और नड्डा की वजह से धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि हिमाचल में कुल 4 लोकसभा सीट हैं।यहां से 2 मंत्री बनाना संभव नहीं है। दूसरी बड़ी वजह ये कि पूर्ण बहुमत वाली सरकार नहीं होने से इस बार ठाकुर जैसे नेताओं को अकोमोडेट नहीं किया जा सका। विधानसभा उपचुनाव में हार पर भी चर्चा थी कि प्रेम कुमार धूमल व बेटे अनुराग के विरोधी धड़े ने पार्टी हाईकमान को रिपोर्ट सौंपी जिसमें अनुराग को हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में आने वाली सुजानपुर, कुटलैहड़ और गगरेट विधानसभा उपचुनाव में ठश्रच् की हार के लिए जिम्मेदार बताया गया। भाजपा का एक धडा जो कुटलैहड़ और सुजानपुर विधानसभा सीट पर पार्टी की हार से दुखी थी उसने अंदरखाने धूमल परिवार को दोषी माना। क्योंकि सुजानपुर में 2017 में ठाकुर के पिता प्रेम कुमार धूमल को राजेंद्र राणा ने हराया था। इस बार कांग्रेस के बागी राजेंद्र राणा को भाजपा ने टिकट दे दिया और और वह चुनाव हार गए। कुटलैहड़ सीट पर भी कांग्रेस के बागी देवेंद्र कुमार भुट्टों ने चुनाव लड़ा और यहां भी भाजपा हार गई। दोनों सीटों पर हार होते ही धूमल परिवार निशाने पर आ गया। अब बताया जा रहा है कि अनुराग ठाकुर को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया जा सकता है व वह संगठन के काम देखेंगे।

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