Site icon 24 News Update

इन परिवारों ममें होली पर होता है 7 दिन का शोक

Advertisements

24 न्यूज अपडेट ब्यूरो। पूरा देश होली के रंगों में डूबा है, वहीं जोधपुर के 125 परिवार ऐसे हैं जो शोक में डूबे हैं। वे होली तक 7 दिनों में ना तो होली मनाते हैं ना घर से बाहर निकलते हैं। गलती से भी रंग लग जाए या मिठाई आ जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। ये आज से नहीं बल्कि 430 सालों से चली आ रही प्रथा है जिसे जोधपुर के ये परिवार आज भी मान रहे हैं। इन्हीं परिवारों में सूरसागर विधायक देवेंद्र जोशी का परिवार भी शामिल है। समाज की नर्सिंग अधिकारी सीमा जोशी बताती हैं कि जैसलमेर के पास पोकरण से 22 किमी दूर बाड़मेर रोड पर मांडवा गांव है। इस गांव में आज से करीब 430 साल पहले चोवटिया जोशी समाज के काफी परिवार रहते थे। यहां पर विक्रम संवत 1752 के फाल्गुन मास में होली के दिन पूरा गांव होलिका दहन का उत्सव मना रहा था। इस दौरान होलिका दहन की परंपरा के तहत परिक्रमा भी लगाई जा रही थी। परिक्रमा के दौरान गांव के मुखिया हरकजी जोशी की पत्नी लाल देवी अपने सबसे छोटे बेटे भागचंद को गोद में लेकर होलिका दहन स्थल की परिक्रमा लगा रही थी। अचानक उनकी गोदी से उछलकर उनका छोटा बेटा भागचंद जलती होलिका में गिर गया था। अपने बेटे को बचाने के लिए मां भी होलिका में कूद पड़ी। परिवार के अन्य लोग और ग्रामीण को समझ पाते से पहले ही मां बेटे दोनों जल गए। पोकरण के पास मंडन गांव में लाला देवी का मंदिर। जहां पर देश विदेश में बसे चोवटिया जोशी परिवार के लोग आकर पूजा करते हैं। पोकरण के पास मंडन गांव में लाला देवी का मंदिर। जहां पर देश विदेश में बसे चोवटिया जोशी परिवार के लोग आकर पूजा करते हैं। विधायक देवेंद्र जोशी के भाई प्रेम जोशी ने बताया होली के 7 दिन पहले ही शुभ कार्य नहीं करता हैं। घरों में पकवान, मिठाइयां भी नहीं बनाई जाती। इन सात दिनों में कोई भी शुभ कार्य करते हैं तो घर में कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है।जोधपुर में ऐसे करीब 125 परिवार है। जो होली को लेकर चली आ रही बरसों पुरानी परंपरा के तहत होली का त्योहार नहीं मनाते हैं। आज तक हम होली के 7 दिन तक शोक रखते हैं। इसके अलावा घरों में मिठाइयां बनाने, नवजात शिशु की ढूंढ करवाने सहित अन्य शुभ कार्य भी नहीं किए जाते हैं। वर्षों पुरानी इस परंपरा को आज भी निभाया जा रहा है।परिवार के लोग आकर पूजा करते हैं। यहां पर साल में एक बार इन परिवार के लोग दर्शन के लिए जरूर जाते हैं।

Exit mobile version