24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। भवन अनुमति के मामले में अगर समयबद्ध तरीके से काम किया जाता है तो यह फैसला मील का पत्थर साबित हो सकता है। इसके लिए इच्छाशक्ति चाहिए और पूरी तरह से भ्रष्ट होकर सड़ रहे सिस्टम से दो दो हाथ करने का माद्दा भी। नगर निगम आयुक्त की ओर से जारी किया गया एक आदेश चर्चा में है। इसमें 15 दिन में भवन अनुमति की फाइलों के निस्तारण के आदेश हुए है। इससे दलालों और उनसे जुड़े कुछ कार्मिको ंमें खलबली है। दस्तूर ये है कि किसी व्यक्ति को बिल्डिंग परमिशन लेनी है तो वह नगर निगम में संपर्क करता है। इशारों में ही उसको कुछ लोग दलालों के नंबर उपलब्ध करवा कर काम करवाने की गली बता देते हैं। भले ही सिस्टम ऑनलाइन हैं लेकिन बार-बार फाइलों में इतने घोंचे डाले जाते हैं कि व्यक्ति को निगम में जूतियां घिसनी ही पडती है। इसके बाद फाइलों को ‘‘रोक्का’’ शुरू हो जता है। फाइल यहां से वहां भटकती हुई नजर आते है, भोलेराम के जीव की तरह। तब तक आवेदक पूछताछ करते करते थक कर चूर हो जाता है और यहीं से शुरू होता है दलालों का असली खेल। इस खेल में कौन-कौन शामिल है यह कहने की जरूरत इसलिए नहीं है क्योंकि सबको पता है। नेता भी जानते हैं, अफसर भी जानते हैं और वे भी जानते हैं जो कुछ समय पहले तक निगम की कमान संभाल रहे थे। दलालों वाले तंत्र में पूरा सिस्टम सेट है। इसका सुबूत ये है कि खुद आयुक्त को 85 फाइलें ऐसी मिलीं जिसमें 60 दिन से अधिक हो गए लेकिन अनुमति जारी नहीं हुई अब उनको यह सख्त आदेश जारी करना पड़ा है। आदेश है कि अब 15 दिन में स्वीकृति जारी की जाए। अगर आयुक्त साहब इस परम्परा को टूटने नहीं देंगे तो दलालों की निगम से सुगम निकासी हो जाएगी। अभी हालत यह बताई जा रही है कि दलालों की अवाजाही बहुत ही सुगम तरीके से निगम के गलियारों में हो रही है। वहीं से सारे इशारे कोड और डीकोड हो जाते है।
नगर निगम के आयुक्त राम प्रकाश ने आदेश जारी किया है कि भवन निर्माण स्वीकृति के वर्तमान में विभाग स्तर पर 119 प्रकरण लम्बित है। इसमें 85 प्रकरण 60 दिन से अधिक समय से लम्बित है। स्थानीय निकाय विभाग, जयपुर द्वारा ऑनलाईन भवन निर्माण स्वीकृति के आवेदनों का निस्ताण 60 दिन में निस्तारित करने के लिए निर्देशित किया गया था लेकिन वर्तमान में 85 प्रकरण 60 दिवस से ज्यादा समय से लम्बित है जो स्वायत्त शासन विभाग के निर्देशों की अवहेलना है तथा आवेदक को अनावश्यक परेशानी होती है। अतः उपनगर नियोजक को निर्देशित किया जाता है कि 60 दिवस से अधिक समय से लम्बित 85 प्रकरणों का आगामी 15 दिवस में आवश्यक रूप से निस्तारण करें। इस हेतु आवेदनकर्ता से सम्पर्क कर समस्त सहायक नगर नियोजक, नगर नियोजक सहायक, कनिष्ठ अभियंता की उपस्थिति में संयुक्त बैठक कर आगामी 15 दिवस में समस्त 85 प्रकरणों का निस्तारण करें तथा भविष्य में भवन निर्माण स्वीकृति के समस्त प्रकरणों को 60 दिवस अवधि से पूर्ण निस्तारण किया जाना सुनिश्चित करे।
आयुक्त ने छड़ी घुमाई, भ्रष्ट कार्मिकों व दलालों की मारी गई कमाई, भवन अनुमतियों की फाइलों से दलाली का बोटलनेक हटने की उम्मीद

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