24 न्यूज अपडेट़ उदयपुर। वन विभाग की जमीन पर राजसमंद वाली मैडम के ससुरजी का नाम आने और रातोंरात अतिक्रमण के प्रयास के हाई प्रोफाइल मामले में आज नया मोड़ आ गया। कल 24 न्यूज अपडेट में समाचार प्रकाशित होने के बाद हड़कंप मच गया और विभाग में अफरा-तफरी का माहौल रहा। अफसर चिंता में पड़ गए कि आखिर इस मामले को कैसे मैनेज करके सुलटाया जाए। क्योंकि एक तरफ राजसमंद वाली मैडम का राजनीति प्रेशर है तो दूसरी तरफ मौके पर पत्थर खाने वाली उनकी अपनी टीम है। मातहत कर्मचारियों में भी कार्रवाई नहीं करने पर अंदरखाने सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। आखिरकार आज यह सामने आया कि इस मामले में 10 अप्रेल को वन विभाग की ओर से एफआईआर दर्ज की गई। इसमें अवैध रूप से वन भूमि पर गैर वानिकी कार्य करने, जेसीबी मशीनों से वनखंड बांकी शिकारवाडी ओदी के पास जेसीबी मशीनों से कार्य करना बताया है। एफआईटार में लिखा गया कि जेसबी मशीन आरजे 27ईए0158, आरजे 27 ईए4329 को जब्त किया गया है। प्रकरण वन अधिनियम 1953 की धारा 26, 52 एवं संशोधित 2012 की धारा 2 के तहत दर्ज किया गया है। मौके पर पंचनामा वनपाल नाई नारायणलाल कुमावत ने बनाया है। प्रकरण 10 अप्रेल में दर्ज किया गया है और इसकी प्रति उप वन संरक्षक, न्यायालय सहायक वन संरक्षक व अति मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम संख्या 3 उदयपुर को भेजी गई है। क्षेत्रीय वन अधिकारी उदयपुर विजेन्द्रसिंह सिसोदिया व स्टाफ की ओर से फर्द अधिग्रहण में बताया गया कि जेसीबी मशीन आरजे 27ईए0158 पीले रंग की है। इसमें आगे जाली उपर ऑन गनर्वमेंट ड्यूटी यूआईटी उदयपुर लाल रंग से लिखा हुआ है। इसके आलवा एक अन्य जेसीबी की भी जब्ती की गई है।
आपको बता दें कि बांकी वनखंड में पहाडी पर जेसीबी से रातोंरात खुदाई हो रही थी व समतल करने और अतिक्रमण का प्रयास हो रहा था। विभाग के जागरूक कर्मचारियों ने मौके पर पहुंच रोकने का प्रयास किया तो उन पर पथराव हो गया। वे जेसीबी की आड में जान बचाकर छिपे। अतिक्रमी एक जेसीबी को लेकर भाग गए। वन विभाग का दस्ता जैसे ही कार्रवाई को आगे बढ़ा, पता चला कि मामला राजसमंद वाली मैडम के ससुरजी का है। अधिकारियों ने साफ कह दिया कि कोई जब्ती मत करना, कार्रवाई मत करना, मैडम बार-बार फोन कर रही है। अफसरों को लगा कि सुबह तक पूरा मामला सेटल हो जाएगा मगर 24 न्यूज अपडेट में खबर प्रकाशित होने के बाद हडकंप मच गया। आज एक प्रमुख समाचार पत्र ने भी समाचार प्रकाशित किया। इसके बाद सामने आया कि एफआईआर की गई है तथा तीन जगहों पर नियमानुसार उसकी सूचना दी गई है। फिलहाल नाका इंचार्ज नारायणलाल कुमावत केस में इन्वेस्टीगेशन कर रहे हैं। मुकेश सैनी उप वन संरक्षक ने पूरे मामले में चुप्पी साध ली है। वन विभाग के पास बिना वारंट गिरफतारी व अधिहरण या राजसात करने का अधिकार है। बताया गया कि मौके पर जेसीबी के डाइवर भाग गए थे। ऐसे में अब अनुसंधान चल रहा है ये किसकी हैं। पहले जांच करेंगे कि जेसीबी लेकर आए लोग आखिर कौन थे। उनके बयान होंगे व उसके आधार पर केस आगे जाएगा। इस हाईप्रोफाइल मामले में सबसे खास बात यह है कि जिसके नामपर एफआईआर हुई है वह अज्ञात है। कल तक राजसमंद वाली मैडम के ससुरजी का नाम आ रहा था, आज कागजों में वह अज्ञात हो गया है। अब मामले की जांच होगी व जांच कितनी लंबी चलेगी, कहा नहीं जा सकता। पत्थर मारने वाले कौन थे, वो कौन से पावरफुल लोग हैं जो आधी रात को पहाड़ों पर जेसीबी बुला कर खुदाई करवाते हैं और एफआईआर में भी उनका नाम नहीं आ पाता। उनके राजनीतिक रसूखात क्या हैं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
मामले का यूआईटी कनेक्शन क्या है
इस मामले में एक जेसीबी पर यूआईटी का नाम लिखा होने से कई सवाल खडे हुए हैं। यह जेसीबी कहीं यूआईटी की प्लानिगं को डील कर रहे किसी ठेकेदार की तो नहीं। यदि है तो भी उस पर ऑन गवर्नमेंट ड्यूटी क्यों लिखा है। क्या ऐसा करने का किसी को अधिकार है। अब यूआईटी व आरटीओ क्या कार्रवाई करते हैं यह भी देखेन वाली बात होगी।
वन विभाग की ओर से दर्ज की गई एफआईआर-
गोवर्धन विलास वन नाके पर जब्त की गई जेसीबी जिस पर लिखा है- ON GOVT. DUTY U.I.T. UDAIPUR

