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आप’ की कसम :ःः आतिशी बनी खड़ाऊं सीएम,केजरीवाल की कुर्सी खाली छोड़ी, कहा- जैसे भरत ने सत्ता संभाली वैसे मैं दिल्ली संभालूंगी

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24 न्यूज अपडेट. नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री के तौर पर आज आतिशी ने कुर्सी संभालकर भी नहीं संभाली। आतिशी ने सुबह 12 बजे जब सीएम के ऑफिस में जब पद संभालने की औपचारिकताएं पूरी की तो इस दौरान सीएम ऑफिस में उनकी सीट के पास ही एक खाली कुर्सी छोड़ी दी। आतिशी बोलीं- ’जैसे राम के वनवास जाने के बाद भरत ने खड़ाऊं रखकर अयोध्या का सिंहासन संभाला, मैं उसी तरह दिल्ली ब्ड की कुर्सी संभालूंगी। 4 महीने बाद दिल्ली के लोग केजरीवाल को फिर से इसी कुर्सी पर बैठाएंगे। तब तक ये कुर्सी इसी कमरे में रहेगी और केजरीवाल जी का इंतजार करेगी।’ आतिशी ने 21 सितंबर को दिल्ली की 9वीं मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। राजनिवास में उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने उन्हें शपथ दिलाई। शपथ के बाद आतिशी ने अरविंद केजरीवाल के पैर छुए। वे दिल्ली की सबसे युवा, केवल 43 साल की उम्र में बनने वाली सीएम है। आतिशी ने शिक्षा, पीडब्ल्यूडी और वित्त समेत 13 विभाग अपने पास रखे। वहीं, सौरभ भारद्वाज को हेल्थ समेत 8 प्रमुख विभाग का जिम्मा दिया गया। आतिशी कालकाजी सीट से तीन बार की विधायक हैं।
आतिशी के बयान पर राजनीति शुरू हो गई है। दिल्ली भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस पर कहा- ’इस हरकत से आतिशी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की गरिमा के साथ ही दिल्ली की जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। यह कोई आदर्श नहीं हैं। चापलूसी है। केजरीवाल बताएं, क्या सरकार रिमोट कंट्रोल से चलाएंगे।’
आपको बता दें कि शराब नीति केस में दिल्ली में 13 सितंबर को जमानत पर बाहर आने के बाद सीएम केजरीवाल ने 17 सितंबर को पद से इस्तीफा दे दिया था। आतिशी को नई सीएम बनाया जिन्होंने आज 5 मंत्रियों के साथ शपथ ली।
आज आतिशी ने क्या कहा
भरत की तरह 4 महीने शासन चलाऊंगी ’आज मैंने दिल्ली के सीएम का कार्यभार संभाला है। आज मेरे मन में वही व्यथा है, जब भगवान श्री राम 14 साल के लिए वनवास गए थे। जिस तरह भरत जी ने 14 साल तक भगवान श्री राम की खड़ाऊं रखकर अयोध्या का शासन संभाला। उसी तरह से आने वाले 4 महीने के लिए मैं दिल्ली सरकार चलाऊंगी।’ ’भगवान श्रीराम ने एक वचन को निभाने के लिए 14 साल का वनवास स्वीकार किया। इसीलिए हम भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहते हैं। उनकी जिंदगी हम सबके लिए मर्यादा और नैतिकता की एक मिसाल है। बिल्कुल उसी तरह अरविंद केजरीवाल ने इस देश की राजनीति में मर्यादा और नैतिकता की एक मिसाल कायम की है।’

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