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अतिक्रमण होते हैं तब मौन साध लेते हैं निगम के अफसर, अतिक्रमण हो जाने के बाद ‘हाईपावर शिकायत’ पर करते हैं मनमानी कार्रवाई

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24 न्यूज अपडेट उदयपुर। नगर निगम में एक दस्तूर बरसों से चल रहा हैं जब अवैध निर्माण होते हैं तब उसे नेताओं और अफसरों की शह पर होने दिया जाता है, सब आंख मूंदकर बैठ जाते हैं। शिकायतों को कूड़ेदान में डाल दिया जाता है मगर जब निर्माण हो चुका होता है तब अचानक किसी हाई पावर अदृश्य शक्ति की शिकायत पर पूरा अमला जाग उठता है और या तो अतिक्रमण हटाने की कोई एक खास कार्रवाई होती जिसमें नोटिस चस्पा करने या सीज करने की कार्रवाई होती है। बाकी शिकायतें ठंडे बस्ते में पड़ी रहती है जिससे यह संदेश जाता है कि अवैध निर्माण के मामलों में भी टार्गेटेड कार्रवाइयां हो रही हैं। जबकि होना यह चाहिए कि सबसे पहले सवाल उस अधिकारी पर उठने चाहिए जो उस इलाके में अतिक्रमण नहीं होने देने के लिए तैनात है, उस बात की तनख्वाह ले रहा है। उसके रहते आखिर अतिक्रमण हो कैसे गया? क्यों नहीं अतिक्रमण होने पर उसकी तनख्वाह से हर्जाना लिया जाना चाहिए। बहरहाल, आज उदयपुर में नगर निगम की टीम ने सुबह होटल जगत निवास पर कार्रवाई की और स्वीकृति से ज्यादा बनाए 7 कमरे सीज कर दिए। नगर निगम आयुक्त के निर्देश पर नगर निगम की टीम सुबह करीब 7 बजे जगत निवास होटल लालघाट पर पहुंची और वहां होटल के 7 कमरों, जिम व अन्य पोर्शन को सीज कर दिया। इस दौरान होटल में गेस्ट ठहरे हुए थे व उनके कमरों के ताले लगे हुए थे। निगम के दस्ते ने ताले तोड़ने की बात कही।
गेस्ट को दूसरे कमरों में करवाना पड़ा शिफ्ट
इस पर आनन-फानन में गेस्ट को अलग कमरों में शिफ्ट करवाया गया। मीडिया रिपोट्स के अनुसार होटल को जी प्लस टू की स्वीकृति थी मगर स्वीकृति विपरीत निर्माण कर कुछ कमरे अतिरिक्त बना दिए। यह निर्माण भी आज का नहीं, 2019 का बताया जा रहा है। उस भाग को सीज करने की खबर है। इस कार्रवाई के दौरान नगर निगम से डीटीपी सिराजुद्दीन,एटीपी विजय डामोर, राजस्व निरीक्षक विजय जैन, राहुल मीणा सहित सुरक्षाकर्मी मौजूद थे। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि सीज किए भाग में कोई निर्माण नहीं करें और अगर ऐसा किया जाता है तो पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। इस बारे में होटल प्रशासन से बात करने का प्रयास किया गया मगर उन्होंने कहा कि उनका कोई पक्ष नहीं है।
मीडिया को जानकारी देने से किया मना
इस मामले में हाई पावर अप्रोच होने से कार्रवाई के बाद हालात यह हो गए कि कार्रवाई करने वालों ने मीडिया को जानकारी देने से ही मना कर दिया। डीटीपी सिराजुद्दीन ने कहा कि एटीपी विजय डमोर से बात कीजिए, एटीपी डामोर ने कहा कि इस मामले में जानकारी सिराजुद्दीन ही दे पाएंगे, उनके पास अधिकार नहीं है, फोन पर वे जानकारी नहीं दे सकते। राजस्व निरीक्षक राहुल मीणा ने भी जानकारी देने से मना कर दिया। ऐसे में सवाल यह उठ खड़ा हुआ कि आखिर कौनसी मजबूरी के चलते कार्रवाई करने वालों ने ही मामले में चुप्पी साध ली। बताया जा रहा है कि उस इलाके में ऐसे सैंकड़ों निर्माण हैं जिनमें मंजूरी का लोचा है। इसके आलवा आस-पास ही कई दिखते हुए अतिक्रमण हैं जिन्हें शिकायतों के बाद भी तोड़ा नहीं जा रहा है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि निगम को शिकायतों का भी इंतजार क्यों, आस-पास कई जगह तो अब भी ताजा-ताजा निर्माण हो रहे हैं। वहां पर निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों की निगाहें क्यों नहीं जा रही है। या फिर जा भी रही है तो आंखें बंद रखने के आदेश हैं।
कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल, कहीं कोई सिस्टम को अपने हिसाब से तो नहीं हांक रहा
इधर, इस मामले में जब हमने अतिक्रमणरोधी समिति के अध्यक्ष पार्षद छोगालाल भाई से बात की तो उन्होंने कहा कि हमको तो बस रोड साइड वाले अतिक्रमण हटाते समय ही इन्वोल्व किया जाता है बाकी ऐसे मामलों में राजस्व शाखा वाले ही कार्रवाई करते हैं। केवल ठेले केबिन हटाने हों तो ही महापौरजी व हम तक एप्रोच की जाती है। इस कार्रवाई से बड़ा सवाल यह उठा है कि यदि वास्तव मे ंसबके अतिक्रमण हटाने की मंशा है तो क्या नगर निगम को पूरे अंदरूनी शहर में सर्वे करवा कर एक साथ अभियान नहीं चलाना चाहिए। अतिक्रमण की आज की कार्रवाई की वैधानिकता पर नहीं, उसकी टाइमिंग और सिर्फ एक चुनींदा कार्रवाई होने पर यह बड़ा सवाल उठाया जा रहा है। जनता में सवाल है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि जिसके पास पावर है वो सिस्टम को ही अपने हिसाब से हांक रहा है????

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