24 न्यूज अपडेट 10, जुलाई, 2024 महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक मात्स्यकी महाविद्यालय, उदयपुर में बुधवार को 24वां भारतीय मत्स्य कृषक दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मात्स्यकी महाविद्यालय के सह-प्राध्यापक डाॅ. एम.एल ओझा एवं सहायक प्राध्यापक डाॅ. सुमन ताकर, तकनीकी सहायक बाबुलाल जाट एवं महाविद्यालय केे कर्मचारी व छात्र-छात्राऐं उपस्थित रहे। इस अवसर पर सह-प्राध्यापक डाॅ. एम.एल ओझा ने बताया कि हर वर्ष 10 जुलाई को मत्स्य कृषक दिवस मनाया जाता है और यह दिवस भारत में पहली बार 10 जुलाई, 1957 में मनाया गया, जो की मत्स्य वैज्ञानिक प्रोफेसर हीरालाल चैधरी व सहयोगी डाॅ. के.एच. अलीकुन्ही ने उड़िसा के कुन्दूर में भारत की प्रमुख कार्प मछली को पिटयुटरी हार्मोन की मदद से सफलपूर्वक प्रेरित प्रजनन करवाया था। उन्होनें बताया की यह दिवस डाॅ. हिरालाल चैधरी एवं डाॅ. के.एच. अलीकुन्ही के इस महत्वपूर्ण सफलता की याद में हर वर्ष मत्स्य कृषक दिवस भारत में मनाया जाता है साथ ही डाॅ. ओझा ने मत्स्य पालन में उज्वल भविष्य के अवसरों एवं आर्थिक क्षैत्र में प्रगति के बारे में बताया। इसके अलावा प्रजनन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किस प्रकार प्रेरित प्रजनन से हमारे देश मंे मछली पालन में निली क्रान्ति आई एवं उसकी वजह से आज हमारा भारत देश विश्व में दुसरे स्थान पर है।
सहायक प्राध्यापक डाॅ. सुमन ताकर ने कहाँ की मत्स्य किसान दिवस का उद्येश्य मात्स्यकी में निली क्रान्ति, मत्स्य पालकों उद्यमिता एवं मछली से जुड़े लोगो को सम्मानित करना इसके साथ ही उत्पाद एंव उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए यह दिवस को हर वर्ष 10 जुलाई को मनाया जाता है। इसके साथ ही मत्स्य पालन में किसानों के योगदान, मत्स्य पालन में रोजगार एवं भविष्य के बारे में छात्र-छात्राओं को इस क्षैत्र के अवसरों के बारे अवगत कराया और बताया कि प्रजनन के लिए गुणवत्तापूर्वक बीज का चयन करना जरूरी है जो की मछली की वृद्धि एवं क्षमता के लिए महत्वपूर्ण योगदान रखती हैं। इस दिवस पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किये।
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