24 न्यूज अपडेट. बांसवाड़ा। कहते हैं कि जुबां से निकला हुआ शब्द कभी वापस नहीं आ सकता, बस उसका असर ही मापा जा सकता है। अपने वाक चातुर्य के लिए दुनिया में मशहूर पीएम नरेन्द्र मोदी मावजी महाराज की धरती बांसवाड़ा में अपने एक बयान से मात खा गए। एक महीने पहले मोदीजी ने चुनावी सभा में कहा था कि – कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा है यदि देश में कांग्रेस की सरकार बनेगी तो हरेक की प्रॉपर्टी का सर्वे किया जाएगा। हमारी बहनों के पास सोना कितना है, मंगलसूत्र कितने हैं, उसकी जांच की जाएगी, उसका हिसाब लगाया जाएगा। आपकी मेहनत की कमाई का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा।’ अगर कांग्रेस की सरकार बनेगी तो हरेक की प्रॉपर्टी का सर्वे किया जाएगा। हमारी बहनों के पास सोना कितना है, इसकी जांच की जाएंगी। चांदी का हिसाब लगाया जाएगा। ये गोल्ड है, बहनों का और जो संपत्ति है वो सबको समान रूप से वितरित कर दी जाएगी। क्या आपकी संपत्ति को सरकार को हैक करने का अधिकार है क्या। क्या आपकी मेहनत करके कमाई गई संपत्ति को सरकार को ऐंठने का अधिकार है। मेरी माताओं-बहनों की जिंदगी में सोना सिर्फ शो करने के लिए नहीं होता है। उसके स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है। उसका मंगलसूत्र सोने की कीमत का मुद्दा नहीं है, उसके जीवन के सपनों से जुड़ा है, उसे छीनने की बात कर रहे हो अपने घोषणा-पत्र में। गोल्ड ले लेंगे, सबको वितरित कर देंगे। पहले जब उनकी सरकार थी, तब उन्होंने कहा था देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। इसका मतलब ये संपत्ति इकट्ठी करके किसको बांटेंगे, जिनके ज्यादा बच्चे हैं, उनको बांटेंगे, घुसपैठियों को बांटेंगे। क्या आपकी मेहनत की कमाई का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा। आपको मंजूर है ये।
अब आज एक महीने बाद पीएम मोदी का यह बयान वागड़ में भाजपा की करारी हार के बाद उनका पीछा करता नजर आ रहा है। बीटीपी और कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि उनके इन बयानों की वजह से ही वागड़ में भाजपा की हार हुई। वागड़ की बहनों पर उनके इस बयान का कोई असर नहीं हुआ क्योंकि उनका मानना था कि किसी के बयान से मंगलसूत्र खतरे में नहीं आ सकता। उन्होंने कांग्रेस के समर्थित प्रत्याशी बाप पार्टी के राजकुमार रोत को जिताने के लिए भरपूर वोट दिए। बांसवाडा एक ट्रिगर प्वाइंट था धु्रवीकरण की राजनीति का मगर इस बार भाजपा का यह दांव उल्टा पड. गया। यह दांव भाजपा ने आदिवासी वोटों को हिन्दुत्व के छाते के तले लाने के लिए किया था मगर छाता काम नहीं आया। यहां तक कि आरएसएस की बिछाई बिसात भी काम नहीं आई। चुनावी विश्लेषकों का कहना था कि राजस्थान की बांसवाडा सभा से पहले ही भाजपा का पता चल गया था कि यहां पर हालत नाजुक है। ऐेसे में वोटों के धु्रवीकरण के लिए उसने आखिरी ब्रह्मास्त्र चलाया जो धर्म की राजनीति का था मगर यह काम नहीं आया। लोग चुनाव दर चुनाव यह समझ गए कि धर्म के आधार पर वोट देने के क्या नुकसान हैं। वागड़ में इस बार बीटीपी की जीत की एक और बड़ी वजह मालवीया का कांग्रेस छोड़कर आना भी रहा। अगर भाजपा अपना प्रत्याशी मैदान में उतारती तो भी उसे लाभ हो सकता था। राजकुमार रोत ऐन वक्त पर कांग्रेस से गठबंधन के बाद भी इसलिए जीत पाए क्योंकि उनका संगठन मजबूत था, कांग्रेस के कई धडे मालवीया को हराना चाहते थे और अंदरखाने मालवीया भितरघात का शिकार हो गए। कई भाजपाई गांठ बांध कर बैठे थे कि मालवीया को निपटना है। यदि मालवीया जीत गए तो उनकी राजनीतिक जमीन ही खत्म हो जाएगी। लोग याद दिला रहे हैं कि एक वीडिया वायरल हुआ था जिसमें मावलीया कहते नजर आ रहे थे कि जो राम के नाम पर वोट नहीं दे उसको ……..कह दो। मगर वह पैंतरा भी काम नहीं आया। दरअसल मालवीया ने भाजपा ज्वाइन तो की मगर वहां भी वे अकेली ही नजर आ रहे थे।
खास विश्लेषण : डूंगरपुर-बांसवाड़ा की महिलाओं ने खारिज किया मोदी का मंगलसूत्र और घुसपैठियों वाला बयान, राजकुमार पर लुटाए वोट, काम नहीं आई संघ की बिसात

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