24 न्यूज अपडेट. भीलवाड़ा। भीलवाड़ा में महात्मा गांधी अस्पताल के बाहर 108 एंबुलेंस का गेट लॉक होने से महिला की जान नहीं बचाई जा सकी। एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर भी नहीं था। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। बेटे ने कहा कि मेडिकल डिपार्टमेंट की लापरवाही के कारण मां की जान गई है। बताया गया कि जवाहर नगर निवासी सुलेखा देवी (43) पत्नी प्रशांत कुमार की मौत हुई। उनके बेटे ने कहा कि संडे होने से आज देर तक सो रहा था, फोन बजने पर उठा तो मां सुलेखा देवी को फांसी के फंदे पर झूलता देखा। छोटे भाई रवि और पापा ने एंबुलेंस की सहायता से हॉस्पिटल पहुंचाया। अस्पताल के बाहर एंबुलेंस आ तो गई मगर उसका गेट लॉक हो गया। ऐसे में कांच तोड़कर महिला को बाहर निकाला मगर तब तक जान जा चुकी थी। बेटे ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर खराब था। तुरंत ऑक्सीजन सपोर्ट मिलता तो जान बचा जाती। इसके अलावा विडंबना यह रही कि एंबुलेंस का ड्राइवर रास्ता भूल गया। महात्मा गांधी अस्पताल लाने की बजाय 3 किलोमीटर दूर दूसरे गांव में ले गया। फिर अस्पताल लेकर गया जिसमें 20 मिनट की देरी हो गई। बेटे ने कहा कि रवानगी के समय मां की सांसें चल रही थी उनकी जाच बच जाती अगर यह सब नहीं होता। सीएमएचओ डॉ. सीपी गोस्वामी ने कहा कि 32 एंबुलेंस संचालित हैं। एंबुलेंस में तकनीकी खराबी नहीं थी। सिलेंडर में ऑक्सीजन थी।
अस्पताल पहुंचे एंबुलेंस, गेट लॉक, कांच तोड़कर निकाला, मरीज की मौत

Advertisements
