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अंधा और संवेदनहीन सिस्टम : संविदाकर्मी को 5 महीने से नहीं मिल रहा था 5600 रूपया वेतन, मौत को गले लगाया तो सरकार ने की 11 लाख के मुआवजे, पत्नी को संविदा नौकरी व सभी संविदाकर्मियों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा

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24 न्यूज अपडेट. जयपुर। कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं कि जिनको देख कर पूरे सिस्टम से ही घिन्न होने लगती है। सरकारें अपने अहम के लिए किसी भी हद तक चली जाती है और उसका शिकार बनता है निचले स्तर पर काम करने वाला अदना सा कर्मचारी। सरकार के लिए 56 सौं रूपया महीना पगार तक देना मुश्किल हो जाता है जबकि कई सरकारी अफसरें के घरों में रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़े जाने के बाद करोड़ो रूपया मिलता है। मौत के बाद अपनी लाज बचाने के लिए आनन फानन में मदद की घोषणा कर दी जाती है। सच कहते हैं कई लोग कि यहां गरीब की मौत पर कोई आंसू बहाने वाला नहीं है। हां, अपनी राजनीति चमकाने उसकी कीमत जरूर लगा दी जाती है। ताजा मामला जयपुर का है। हाईकोर्ट की जयपुर बेंच के जीए ऑफिस के अपील सेक्शन संविदाकर्मी ने शुक्रवार सुबह ऑफिस में ही फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया था। मरने वाला मनीष सैनी 19 साल से हाईकोर्ट में संविदा पर काम कर रहा था। उसका मानदेय केवल 5600 रुपए था। ये पैसा भी उसको 5 महीने से नहीं मिल रहा था। संविदाकर्मी की मौत के 12 घंटे बाद हंगामा होने पर अपनी लाज बचाने के लिए राज्य सरकार ने संविदाकर्मियों का मानदेय 17 हजार रुपए तक बढ़ा दिया है। दौसा के रहने वाले मनीष (40) के चाचा राजेंद्र सैनी ने मीडिया से कहा कि शुक्रवार सुबह 8.45 बजे हाईकोर्ट से साथी संविदाकर्मियों ने मनीष के सुसाइड करने की जानकारी दी। सुसाइड नोट में मनीष ने लिखा कि ‘मुझे वीरगति प्राप्त हो, राज्य सरकार ने मेरा तो भला नहीं किया, लेकिन मेरे भाइयों का भला हो।’
मनीष की मौत के 12 घंटे बाद ही राज्य सरकार की मर चुकी आत्मा अचानक जाग उठी। राज्य सरकार ने संविदाकर्मियों का मानदेय बढ़ा दिया। अब 6900 की जगह 17 हजार, 5600 की जगह 14 हजार और 4400 की जगह 11 हजार रुपए तक मानदेय मिलेगा। मनीष पिछले 18 साल से हाईकोर्ट में संविदा पर कार्यरत था और उसे हर महीने 5600 रुपए मानदेय मिल रहा था। पांच महीने से यह पैसा भी नहीं मिल रहा था। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्होंने बताया कि मनीष घर से रोजाना हाईकोर्ट आने के लिए अप-डाउन करता था। मनीष की चार साल की बेटी व एक छोटा बेटा है। राज्य सरकार ने उसके परिजनों को 11 लाख रुपए मुआवजा व पत्नी को बांदीकुई में संविदा पर नौकरी देने के लिए कहा है। वहीं, एजी ऑफिस से भी परिजनों को एक लाख रुपए मुआवजा देने का निर्णय लिया।राज्य सरकार से मनीष के परिजनों की मांगों पर सहमति बनने के बाद मनीष के शव को हाईकोर्ट से एसएमएस हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया।
हाईकोर्ट की जयपुर बेंच में ही 60 से ज्यादा लोग 2005 से ही संविदा पर हैं। इनमें से 22 लोग स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर 2013 में हाईकोर्ट गए थे। डबल बेंच ने 13 जनवरी 2022 को उनके पक्ष में फैसला देते हुए स्थायी नियुक्ति के आदेश जारी किए थे लेकिन जैसा कि कई मामलों में होता है, गहलोत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी लगा दी। इसके बाद करीब ढाई साल से सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित ही है। अब सामने आ रहा है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में दायर राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका को भी वापस ले सकती है।

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