24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन बलिदान करने वाले प्रातः स्मरणीय वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की जयंति पर जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति सचिवालय के सभागार में शुक्रवार को आयोजित संगोष्ठी में प्रताप के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि भारतीय संस्कृति, भारतीय स्वाभिमान, भारतीय गौरव, भारतीय वैभव, भारतीय त्याग, बलिदान, भारतीय शौर्य, वीरता आदि को गाथा के रूप में कहना चाहेंगे तो हमारे सामने एक ही नाम आता है वो है वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप। हर माता-पिता मातृभूमि से यही प्रार्थना करते है कि उसे ऐसे पुत्र को जन्म दें जैसे हैं महाराणा प्रताप। महाराणा प्रताप ने पूरे विश्व को एक संदेश दिया कि व्यक्ति अगर स्वतंत्र नहीं है तो वह अपनी इच्छाओं को कभी क्रियान्वित नहीं कर सकता, वो सपने नहीं देख सकता, वो कोई कार्य नहीं कर सकता व आगे भी नहीं बढ सकता। हमें सबसे पहले स्वतंत्र होना है और स्वतंत्रता र्प्राप्ति के लिए हमें सदैव तैयार रहना चाहिए। मेवाड़ को विदेशों में भी महाराणा प्रताप के नाम से जाना जाता है। अकबर का सपना था कि पूरे देश पर अपना कब्जा कर लूं, सभी राजा, महाराजाओं ने समझौता कर लिया, मेवाड़ में प्रताप ने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। कई प्रलोभन भी दिये लेकिन वे अंत तक अडिग रहे। वो चाहते थे कि उनकी प्रजा किसी के अधीन नहीं रहे और अंत तक युद्ध करते रहे और अकबर की सेना को पीछे हटना पडा। महाराणा प्रताप के पांच गुणों पर चर्चा करते हुए कहा कि वे मस्तिष्क को केन्द्र में रखते हुए विचार करते थे और आगे की नीति निर्धारित करते थे। दूसरा गुण शारीरिक शक्ति के अनुशासन वो आयुध धारण करते थे। तीसरा गुण उनका आत्म बल बहुत ही मजबूत था जो किसी भी परिस्थिति में निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाता है। वही, उनका चौथा गुण उनकी सधी हुई, दिनचर्या के रूप में था जिसमें ईश्वर स्मरण के साथ प्रारंभ होकर अन्य कार्य को सम्पादित करते थे। पांचवा गुण देश भक्ति स्वाभाविक गुण था जो उन्हे विरासत में मिला था।
अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि महाराणा प्रताप को वेदों और पुराणों का अच्छी तरह से ज्ञान था। उसी अनुरूप इस पद्धति का युद्ध में प्रयोग किया। प्रताप ने 14 वर्ष की उम्र में पहला युद्ध लड़ा। 1567 में जब अकबर ने चितौड़ पर आक्रमण किया तो वहॉ से प्रताप और उदय सिंह को सुरक्षित निकाला गया। प्रताप की सेना में 20 हजार सैनिक थे जबकि अकबर की सेना में 80 हजार सैनिक थे , उनका पूरा युद्ध गोरिल्ला पद्धति से किया और अंत में अकबर की सेना को पीछे हटना पडा।
इस अवसर पर पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. मलय पानेरी, डॉ. हेमेन्द्र चौधरी, डॉ. युवराज सिंह राठौड़, डॉ. रचना राठौड़, डॉ. सुनिता मुर्डिया, डॉ. शीतल चुग, निजी सचिव केके कुमावत, जितेन्द्र सिंह चौहान, उमराव सिंह राणावत, डॉ. रोहित कुमावत, डॉ. मंगलश्री दुलावत सहित कार्यकर्ताओं ने प्रताप के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धा भाव से नमन किया।
Discover more from 24 News Update
Subscribe to get the latest posts sent to your email.