कविता परखा 24 न्यूज़ अपडेट निंबाहेड़ा। पुण्यश्लोक देवी अहिल्या बाई होलकर मातृशक्ति सम्मेलन कृषि उपज मंडी निंबाहेड़ा में आयोजित किया गया। मातृशक्ति सम्मेलन महिला समन्वय की विभाग संयोजिका प्रियंका जैन ने बताया कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जन्म के त्रिशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मातृशक्ति सम्मेलन महिला समन्वय चित्तौड़गढ़ विभाग के तत्वावधान में शुक्रवार को दोपहर 03.30 बजे कृषि उपज मंण्डी, निम्बाहेड़ा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यवक्ता सुरेश भैय्या जोशी अखिल भारतीय कार्यकारणी सदस्य एवं पूर्व सर कार्यवाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्य वक्ता रहे, साथ ही कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉक्टर नील प्रभा रेडियोलॉजिस्ट और कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रियंका कटारा, सहायक कृषि अधिकारी रही। कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती और देवी अहिल्याबाई होलकर के चित्र के समक्ष अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि डॉक्टर नील प्रभा ने अपने उद्बोधन में बताया कि पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होल्कर का चरित्र इतना प्रभावशाली है कि 300 वर्ष बाद भी आज पूरा देश उनका जन्म दिवस मना रहा है, उनका जन्म त्याग, तपस्या, शौर्य, संस्कृति और समरसता को समर्पित रहा है। वही कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रियंका कटारा ने अपने उद्बोधन में बताया कि देवी अहिल्याबाई होलकर ने अपना संपूर्ण जीवन प्यासों के लिए पानी, भूखे के लिए भोजन और मंदिरों के जीर्णोद्धार में समर्पित किया है, वे नारियों के लिए सदैव प्रेरणा बनी रहेगी और उन्हें हम देवी के रूप में पूजेंगे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुरेश भैयाजी जोशी ने अपने उद्बोधन में लोकमाता देवी अहिल्याबाई के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए अपना वक्तव्य रखा। उन्होंने बताया कि हमारे देश में हजारों माताओं ने श्रेष्ठ नेतृत्व दिया है, वर्तमान में भी कला में, विज्ञान में, सेवा में, व्यापार में, नेतृत्व में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज हम देवी अहिल्याबाई होलकर का 300 वा जन्म दिवस मना रहे हैं साथ ही रानी दुर्गावती का भी 500 वा जन्म वर्ष चल रहा है। भारत के इतिहास में मातृशक्ति ने हमेशा अपना समर्पण दिया है। यदि इतिहास में देवी शकुंतला नहीं होती तो भरत नहीं होते और यदि मां जीजाबाई नहीं होती तो शिवाजी नहीं होते। भैय्या जी जोशी ने अपने उद्बोधन में बताया कि देवी अहिल्याबाई को महारानी से संबोधित नहीं किया जाता है जबकि उन्हें आदर के साथ लोकमाता के नाम से संबोधित किया जाता है और वे एकमात्र इस पूरे विश्व में है जिनके नाम के आगे पुण्यश्लोक लगा हुआ है क्योंकि उन्होंने पूरे जीवन में पुण्य कर्म के अलावा कोई अन्य कार्य नहीं किए हैं। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर ने अपने संपूर्ण जीवन में रकुरीतियों के विरुद्ध अपने स्वर मुखर किए हैं जिसमें प्रमुखता के साथ उन्होंने सती प्रथा का विरोध किया और महिलाओं को इसके बारे में जागरूक किया, दुर्भाग्य से उनके पति खंडेराव का निधन होने पर भी उनके ससुर मल्हार राव की सहमति से सती नहीं होने का फैसला किया और समाज में इस बदलाव को अग्रेषित किया। उन्होंने अपने राज्य की सीमा का उल्लंघन करते हुए अपने जीवन काल में डेढ़ सौ से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया, जिसमें काशी का मंदिर और सोमनाथ का मंदिर प्रमुख है। उन्होंने अपने उद्बोधन में बताया कि देवी अहिल्याबाई होलकर के जीवन में जाति भेदभाव का कोई नामोनिशान नहीं था, जीवन भर समाज की चिंता, समाज एक रस रहे जिसकी चिंता, समाज सुरक्षित रहे यह भाव रखते हुए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया। यह संपूर्ण कार्यक्रम जिसमें मंच का संचालन सहित एकल गीत, पूर्ण मंत्र आदि मातृशक्ति द्वारा ही आयोजित किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र की मातृशक्ति सहित गण मान्य जन उपस्थित रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation ’अ.वि.वि.नि.श्रमिक संघ ने अधीक्षण अभियंता का स्वागत कर ज्ञापन सौपा दिन-दहाडे चोरो ने मकान के ताले तोडकर एक नकद राषि पर हाथ साफ किया