
24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। उदयपुर में शुक्रवार को खाद्य एवं पोषण सुरक्षा एवं पौष्टिक अनाज विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें गिर्वा, कुराबड़, सायरा, गोगुंदा और कोटड़ा के करीब 100 किसानों ने भाग लिया।
कार्यशाला में अनुसंधान निदेशक एमपीयूएटी डॉ. अरविंद वर्मा ने कहा कि भारत की आबादी 33 करोड़ से बढ़कर 150 करोड़ हो गई है, जिससे खाद्यान्न की मांग बढ़ी। पहले केवल कांगणी, रागी, सांवा, कुटकी, बाजरा और ज्वार जैसे मोटे अनाज खाए जाते थे, लेकिन आज गेहूं और चावल का अत्यधिक उपयोग हो रहा है। उन्होंने किसानों को कम से कम 20% भूमि पर मोटे अनाज की खेती करने की शपथ दिलाई।
कीट विज्ञानी डॉ. आर. स्वामीनाथन ने बताया कि मोटे अनाज की फसलों में कीट व बीमारियां कम लगती हैं, और इनकी रक्षा के लिए हजारे के फूल के पौधे लगाने की सलाह दी। अनुवांशिकी विभागाध्यक्ष डॉ. हेमलता शर्मा ने श्रीअन्न को खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य, पर्यावरण और घरेलू सुरक्षा के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने मोटे अनाज से रोटी, इडली, हलवा आदि बनाने के तरीके भी बताए।
पूर्व संयुक्त निदेशक कृषि बसंत कुमार धूपिया ने रासायनिक उर्वरकों का सीमित उपयोग करने और खेतों की सेहत सुधारने पर जोर दिया। होम साइंस कॉलेज की डॉ. विशाखा सिंह ने मोटे अनाज से बने केक, बिस्किट, कुकीज और ब्रेड जैसे उत्पादों की जानकारी दी।
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक कृषि सुधीर कुमार वर्मा, सहायक निदेशक श्यामलाल सालवी, डॉ. डी.पी. सिंह, रामेश्वर लाल सालवी, हरीश टांक सहित कई विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। कार्यशाला में श्रीअन्न की लाइव स्टॉल लगाई गई, ताकि किसान मोटे अनाज की उपयोगिता को करीब से समझ सकें। एमपीयूएटी की ओर से किसानों को बाजरा एवं अन्य श्रीअन्न के बीज भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
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