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औदिच्य समाज की महिलाओं ने 10 गांठ लगाकर पहना दशामाता का धागा, सुहागिनों ने की पूजा-अर्चना, पति के लिए मांगी लंबी उम्र

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24 News Update उदयपुर। शहर के पुरोहितों की मादड़ी स्थित दुदाजी का देवरा मंदिर के पास हुनमान मंदिर में शुक्रवार को औदिच्य समाज की महिलाओं ने दशामाता का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने सुबह से सज-धजकर पीपल वृक्ष के नीचे दशामाता की पूजा-अर्चना की और 10 गांठ वाला धागा गले में पहनकर पति की लंबी उम्र व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पूजन के बाद महिलाओं ने माता की कथा सुनकर घर-परिवार की दशा सुधारने की प्रार्थना की।
पीपल वृक्ष के नीचे हुआ विधि-विधान से पूजन
क्षेत्रवासी दिव्या डूंगावत ने बताया कि दशामाता पर्व के अवसर पर शहर के मंदिरों और पीपल वृक्षों के आसपास सुबह से ही महिलाओं की भीड़ दिखाई दी। महिलाएं सुहाग का प्रतीक चुंदड़ी की साड़ी पहनकर और पारंपरिक श्रृंगार के साथ पूजन स्थलों पर पहुंचीं। पीपल के पेड़ की पूजा कर कुमकुम और मेहंदी अर्पित की गई। इसके साथ ही आटे से बने आभूषण, दही का औलिया, मिठाइयां, पूरी-सब्जी सहित अन्य प्रसाद चढ़ाकर विधि-विधान से माता का पूजन किया गया।
10 गांठ वाला धागा पहन मांगी अखंड सौभाग्य की कामना
क्षेत्रवासी दीपिका व्यास ने बताया कि पूजन के दौरान महिलाओं ने दशामाता का विशेष धागा तैयार कर उसमें 10 गांठें लगाईं। इसके बाद इस धागे को गले में पहनकर पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना की। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा करने और धागा धारण करने से घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
कथा श्रवण का भी रहा विशेष महत्व
क्षेत्रवासी खुशबू गोन्दावत ने बताया कि पूजन के बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से दशा माता की कथाएं सुनीं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन माता की दस कथाएं सुनने का विशेष महत्व होता है। कथाओं के माध्यम से महिलाओं ने परिवार की खुशहाली, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।
व्रत रखकर मनाया जाता है पर्व
क्षेत्रवासी द्रोपदी गोन्दावत ने बताया कि दशामाता का पर्व सुहागिन महिलाएं बड़े उत्साह के साथ मनाती हैं। इस दिन महिलाएं सुबह से शाम तक व्रत रखकर पूजा-अर्चना करती हैं और परिवार की दशा सुधारने तथा पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। शहर के विभिन्न मंदिरों और मोहल्लों में दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा और महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व मनाया।

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