24 News update उदयपुर। बीकानेर में आयोजित बीकानेर रंग महोत्सव के दसवें संस्करण में इस बार उदयपुर की रंग परंपरा और साहित्यिक चेतना की उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज हुई। देश के प्रमुख रंग आयोजनों में प्रतिष्ठित इस महोत्सव में उदयपुर से नाट्य निर्देशक सुनील टांक तथा वरिष्ठ साहित्यकार कुंदन माली को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया, जिन्होंने अपने विचारों और अनुभवों के माध्यम से मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच पर प्रस्तुत किया। देश के महत्वपूर्ण रंग आयोजनों में गिने जाने वाला यह महोत्सव राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित भारत रंग महोत्सव के बाद देश का दूसरा बड़ा नाट्य आयोजन माना जाता है। नाटकों के महाकुंभ के रूप में प्रतिष्ठित यह आयोजन इस वर्ष छह दिनों तक चला, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए रंगकर्मियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से रंगमंच की विविधता का प्रदर्शन किया।महोत्सव के दौरान तीस से अधिक रंगमंचीय नाट्य प्रस्तुतियां और लगभग पचास नुक्कड़ नाटकों का मंचन हुआ। इसके साथ ही रंगमंच और साहित्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर कई सारगर्भित चर्चाएं भी आयोजित की गईं। इन परिचर्चाओं में देश के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों और रंगकर्मियों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से नंद किशोर आचार्य, प्रदीप भटनागर, अर्जुन देव चारण, गोपाल आचार्य, मधु आचार्य, हरीश बी. शर्मा तथा सुरेन्द्र धारणिया सहित अनेक साहित्यकार और नाटककार उपस्थित रहे।इस वर्ष महोत्सव को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक देवेंद्र राज अंकुर को समर्पित किया गया और उनकी उपस्थिति में ही इस सांस्कृतिक आयोजन का शुभारंभ हुआ। इस महोत्सव को व्यापक पहचान दिलाने में सुदेश व्यास और उनकी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिनके सतत प्रयासों से यह आयोजन राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना चुका है। निर्मोही व्यास सम्मान अजय कुमार को प्रदान किया गया। वहीं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के रंगमंडल प्रमुख राजेश सिंह की उपस्थिति में रंगमंडल द्वारा रामगोपाल बजाज के कालजयी नाटक ‘अंधायुग’ सहित कई महत्वपूर्ण नाटकों का प्रभावशाली मंचन किया गया।इसके अतिरिक्त ‘सरफरोश’, ‘स्वदेश’, ‘मकड़ी’ और ‘जंगल’ जैसी फिल्मों में अभिनय से पहचान बनाने वाले अभिनेता मकरंद देशपांडे ने नाटक ‘पियक्कड़’ की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।पूरे बीकानेर शहर में अलग-अलग स्थानों पर नाट्य मंचन, साहित्यिक चर्चा, पुस्तक दीर्घा, कार्यशालाएं, परिचर्चाएं, संगीत कार्यक्रम, लोक कला प्रस्तुतियां, धरोहर परिक्रमा और नुक्कड़ नाटकों सहित अनेक सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं। प्रतिदिन प्रातः आठ बजे से रात्रि ग्यारह बजे तक चलने वाले इन आयोजनों में देशभर से आए एक हजार से अधिक रंगकर्मी और साहित्यकार शामिल हुए, जिससे पूरा शहर मानो एक विशाल सांस्कृतिक कुंभ में परिवर्तित हो गया।इसी अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार कुंदन माली ने उदयपुर के साहित्यिक योगदान और उसकी समृद्ध परंपरा पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं नाट्य निर्देशक सुनील टांक ने उदयपुर के रंगमंच, लोक कलाओं और मेवाड़ की कला-संस्कृति से उपस्थित लोगों को परिचित कराया। उन्होंने उदयपुर शहर और मेवाड़ संभाग की विविध कलाओं तथा सांस्कृतिक परंपराओं का परिचय देते हुए इस सांस्कृतिक महोत्सव में शहर का प्रतिनिधित्व किया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation होमगार्ड अभ्यर्थियों की नामांकन प्रक्रिया 29 से 31 मार्च तक, 350 पदों के लिए 7711 अभ्यर्थी लेंगे भाग पंच गौरव के तहत तैराकी में उभरी नई प्रतिभाएं, ब्लॉक स्तरीय स्पर्धाओं में खिलाड़ियों ने दिखाया दम