उदयपुर, 8 मार्च। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर द्वारा मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत रविवार को शिल्पग्राम स्थित दर्पण सभागार में हिमाचल कल्चरल रिसर्च फोरम एवं थियेटर रेपेटरी द्वारा पांचाली नाटक का सशक्त मंचन किया गया। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में इस प्रभावशाली प्रस्तुति को खूब सराहा गया।पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक फ़ुरकान खान ने बताया की प्रति माह आयोजित होने वाली मासिक नाट्य संध्या रंगशाला के अंतर्गत हिमाचल कल्चरल रिसर्च फोरम एवं थियेटर रेपेटरी द्वारा पांचाली नाटक का मंचन रविवार को शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में किया गया। इस नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन थिएटर विशेषज्ञ एनएसडी, नई दिल्ली और एनसीजेडसीसी के पूर्व निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा ने किया। इस नाटक ने द्रौपदी के चरित्र के माध्यम से स्त्री के संघर्ष, गरिमा और अधिकारों की कहानी को उजागर किया।पांचाली परंपरागत अर्थों में एक नाटक न होकर नंदकिशोर आचार्य द्वारा रचित एक दीर्घ कविता है, जिसमें पांचाली के जीवन प्रसंगों के माध्यम से स्त्री की पीड़ा, संघर्ष और आत्मचिंतन को गहराई से अभिव्यक्त किया गया है। जिसमें पांचाली का यह कथन है कि वह केवल उपभोग की वस्तु बनकर रह गई थी, लेकिन आज भी यह कथन उतना ही प्रासंगिक प्रतीत होता है। समय के लंबे अंतराल के बावजूद नारी की स्थिति में अपेक्षित परिवर्तन न हो पाना इस प्रस्तुति का केंद्रीय भाव है। अपनी अंतिम यात्रा में पांचाली द्वारा स्वयं से पूछे गए प्रश्न आज की आधुनिक स्त्री के समक्ष भी यक्ष प्रश्न बनकर खड़े हैं। वस्तुतः पांचाली के ये प्रश्न आज की स्त्री के ही प्रश्न हैं।प्रो. सुरेश शर्मा के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत यह कृति अभिनय, भाव-भंगिमाओं, मुद्राओं और प्रतीकों व अभिनय के माध्यम से एक सशक्त नाट्य-रचना बनकर उभरी। प्रस्तुति में पांचाली के चरित्र के माध्यम से नारी सशक्तिकरण की प्रभावी झलक देखने को मिली। सभी कलाकारों का अभिनय अत्यंत सराहनीय रहा। इस नाटक में कलाकार के रूप में संपा मंडल, रिद्धिमा बग्गा, अर्चना राजपूत, आयुषी की मुख्य भूमिकाएं रही। जबकि संगीत काजल घोष, कोरियोग्राफी संगीता शर्मा, मंच व्यवस्था पिंटू झा व प्रस्तुति सहायक हर्ष राज द्वारा किया गया।रंगमंच प्रेमियों ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की इस पहल की प्रशंसा करते हुए ऐसे आयोजनों के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया।इस अवसर पर केन्द्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, कार्यक्रम कार्यकारी हेमंत मेहता, दयाराम सुथार, सिद्धांत भटनागर सहित केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी एवं शहर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक (वित्तीय एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने किया।नाटक की कहानी –यह नाटक द्रोपदी के जीवन पर रची गई कविताओं पर आधारित था। इस नाटक के माध्यम से नारी पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ सशक्तिकरण की धारणा को प्रस्तुत किया गया। संदेश दिया गया कि नारी खुद अपनी रक्षा करने के लिए तैयार हो चुकी है। नाटक में न सिर्फ पुरुष वर्ग का नकारात्मक चेहरा दिखाया गया, बल्कि उनके सकारात्मक रवैए को भी दर्शाया गया। यहां पांचाली ने ये भाव व्यक्त किए – मैं कोमल जरूर हूं, लेकिन कमजोर नहीं हूं। मुझे मेरी सुरक्षा के लिए किसी भी पुरुष प्रधान मानसिकता और उनके सहयोग की आवश्यकता नहीं है। मैं अपनी रक्षा स्वयं कर सकती हूं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation माहेश्वरी पंचायत धानमंडी के होली मिलन समारोह में दिखावे के खर्च रोकने का किया आह्वान वाणिज्य महाविद्यालय में निवेशक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, विद्यार्थियों को दी वित्तीय निवेश की जानकारी