साहित्य का होश और तकनीक का जोश से प्रयोग आवश्यक – श्रीमाली
उदयपुर, 24 सितम्बर। राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर और विद्या भवन रूरल इंस्टीट्यूट के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “साहित्य एवं तकनीक” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राजस्थान सरकार के कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के सांस्कृतिक सृजन पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित हुआ।
मुख्य वक्ता श्री जे.पी. श्रीमाली ने कहा कि “साहित्य और तकनीक एक सिक्के के दो पहलू हैं। जैसे विद्यार्थी और अध्यापक का आपसी रिश्ता होता है, वैसे ही साहित्य और तकनीक का संबंध है। समाज की उन्नति के लिए साहित्य का होश और तकनीक का जोश दोनों का संतुलित प्रयोग आवश्यक है।” उन्होंने कहा कि तकनीक भी उतनी ही पुरानी है जितना साहित्य और दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, पूर्व संभागीय आयुक्त एवं विद्या भवन सोसायटी के मुख्य संचालक राजेंद्र भट्ट ने कहा कि “बिना तकनीक के साहित्य अधूरा है। साहित्य समाज का दर्पण है और मन की प्रेरणा ही साहित्य को जन्म देती है।”
गोष्ठी के खुले सत्र में डॉ. लक्ष्मी लाल वैरागी, श्री श्याम मठपाल, श्री पुष्पेंद्र राणावत, डॉ. निर्मला शर्मा, डॉ. मनीष रावल, डॉ. हर्षिता भटनागर, डॉ. विकास बया, श्री जगदीश मेघवाल और श्री पूरब सोनी ने अपने विचार रखे।
गोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. कनिका शर्मा ने करते हुए कहा कि संस्थान साहित्य को बढ़ावा देने के लिए सदैव सक्रिय है और साहित्य अकादमी से जुड़ाव से नए आयाम प्राप्त होंगे।
आयोजन सचिव एवं हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सरस्वती जोशी ने स्वागत भाषण और विषय परिचय प्रस्तुत किया। साहित्य अकादमी से आए श्री राजेश मेहता ने विद्यार्थियों को साहित्यिक रुचि विकसित कर अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया तथा आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोज राजगुरु ने किया। इस अवसर पर डॉ. अर्चना जैन, डॉ. सबा खान, डॉ. लक्ष्मण सिंह, डॉ. नीरू श्रीमाली, डॉ. सुषमा जैन, डॉ. रतन सुथार, डॉ. बरखा रानी सहित महाविद्यालय के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी मौजूद रहे। कुल मिलाकर लगभग 80 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

