उदयपुर/जयपुर। राज्य सरकार द्वारा कर्मचारी हितों की लगातार उपेक्षा के विरोध में अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के नेतृत्व में जयपुर में आयोजित संघर्ष चेतना महाअधिवेशन में कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। वैशाली नगर स्थित खण्डेलवाल ऑडिटोरियम में महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष महावीर शर्मा की अध्यक्षता में हुए इस महाअधिवेशन में प्रदेशभर से पहुंचे हजारों कर्मचारियों ने एक स्वर में सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की।
महाअधिवेशन में राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शेरसिंह चौहान के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों एवं शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रदेशभर से आए शिक्षक प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर अपनी लंबित और जायज मांगों को मजबूती से रखा।
प्रदेशाध्यक्ष शेरसिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान में राज्य सरकार पर नौकरशाही पूरी तरह हावी है और कर्मचारी हितों की अनदेखी की जा रही है। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण व पदोन्नति अटकी हुई है, वेतन विसंगतियां दूर नहीं की जा रही हैं और स्थानांतरण नीति आज भी अस्पष्ट बनी हुई है। संविदा कर्मियों का शोषण, OPS में अनावश्यक हस्तक्षेप तथा RGHS जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में कटौतियों ने कर्मचारियों में भारी असंतोष पैदा कर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो महासंघ को प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
महाअधिवेशन में पदोन्नति विसंगतियां दूर करने, OPS से छेड़छाड़ बंद करने, पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने, संविदा कर्मियों को नियमित करने, RGHS में कटौतियां समाप्त करने तथा कर्मचारियों के 11 सूत्री मांग पत्र को शीघ्र लागू करने की प्रमुख मांगें दोहराई गईं।
कार्यक्रम के अंत में महासंघ नेतृत्व ने कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित रहकर संघर्ष को मजबूती दें। महाअधिवेशन में गोपाल मीणा, सतीश जैन, जवरी लाल प्रजापत, शंभु सिंह मेड़तिया, राजेश शर्मा, रणवीर यादव, प्रकाश विश्नोई, सत्येन्द्र यादव, राहुल गुर्जर, कन्हैयालाल सहित पंचायती राज शिक्षक संघ व अन्य संबद्ध संगठनों के पदाधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

