24 News Update उदयपुर। एक दिन पहले तक जिन ढाई लाख अभ्यर्थियों को राहत की सांस मिली थी, उनकी खुशियां 24 घंटे भी नहीं टिक सकीं। सुप्रीम कोर्ट के पहले आदेश ने उम्मीद जगाई थी कि 2021 के सभी अभ्यर्थियों को 2025 की एसआई भर्ती परीक्षा में बैठने का मौका मिलेगा, लेकिन अगले ही दिन आदेश पलट गया व अब सिर्फ वही अभ्यर्थी परीक्षा दे पाएंगे, जिन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की है।
इस फैसले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह न्याय नहीं, बल्कि “लूपहोल आधारित न्याय” है—जहां सिस्टम की खामियों के कारण ओवरएज हुए लाखों युवाओं को एक झटके में बाहर कर दिया गया। सवाल उठ रहा है कि क्या परीक्षा देना सिर्फ उन्हीं का अधिकार है जो कोर्ट तक पहुंच सकते हैं? जो वकीलों की फीस अफोर्ड कर सकते हैं?? उनको नहीं जिनके अभिभाव पाई पाई जुटा कर बच्चों को एग्जाम दिलवा रहे हैं मगर वे सिस्टम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक तनहीं जा सकते।
सरकार को लेना चाहिए था ओवरएज अभ्यर्थियों का पक्ष
राजस्थान लोक सेवा आयोग यानी राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा तुरंत कोर्ट में दोबारा याचिका लगाकर पुराने आदेश को चुनौती देना भी अब आलोचना के घेरे में है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग और सरकार को उनके पक्ष में मजबूती से खड़ा होना चाहिए था, लेकिन इसके उलट उन्होंने दायरा सीमित करवा दिया।
उदयपुर में परीक्षा 5 व 6 को
उदयपुर में 5 और 6 अप्रैल को होने वाली इस परीक्षा के लिए 105 केंद्र बनाए गए हैं, जहां करीब 1 लाख 32 हजार 628 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, 18 सतर्कता दल और 179 पर्यवेक्षक तैनात हैं, लेकिन इन तैयारियों के बीच एक बड़ा वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या न्याय केवल याचिका लगाने वालों तक सीमित रहेगा? जो गरीब अभ्यर्थी कोर्ट जाने का खर्च नहीं उठा सकते, उनका भविष्य कौन तय करेगा? अभ्यर्थियों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि अगर एक समूह कोर्ट गया था, तो फैसला सभी प्रभावितों के पक्ष में होना चाहिए था। लेकिन अब यह लड़ाई “सिस्टम बनाम अभ्यर्थी” बन चुकी है।
फिलहाल परीक्षा अपने तय समय पर होगी, लेकिन इस फैसले ने यह बहस जरूर छेड़ दी है कि—देश में ज्यादा जरूरी क्या है, परीक्षा की प्रक्रिया या फिर उस प्रक्रिया से छूट गए युवाओं का भविष्य?

